इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चाइनीज मांझा पर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। यह फैसला मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने दिया। मामला जौनपुर के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव और दो अन्य लोगों की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।
क्यों लगा यह प्रतिबंध?
दरअसल, चाइनीज मांझा बहुत खतरनाक होता है। यह आमतौर पर नायलॉन के धागे में शीशे का पाउडर, गोंद और दूसरे तेज पदार्थ मिलाकर बनाया जाता है। इससे धागा रेजर ब्लेड जितना काटने वाला हो जाता है। कपड़े पहनने के बावजूद यह गले, हाथ या शरीर के किसी भी हिस्से को आसानी से काट सकता है। इससे लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं और कई बार मौत भी हो जाती है। कोर्ट ने कहा कि यह न सिर्फ इंसानों के लिए, बल्कि पक्षियों और जानवरों के लिए भी जानलेवा है। पतंग उड़ाने का सीजन आते ही ऐसे हादसे बढ़ जाते हैं, इसलिए राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि इस पर पूरी तरह रोक लगाए।
दिल दहला देने वाली घटनाएं
याचिका में जौनपुर की घटनाओं का जिक्र किया गया। 11 दिसंबर 2025 को एक अध्यापक संदीप तिवारी की शास्त्री ब्रिज पर चाइनीज मांझा से गला कटने से मौत हो गई। इससे पहले 15 सितंबर 2015 को भी उत्तम दुबे नाम के शख्स की इसी तरह मौत हुई थी। कोर्ट ने नोट किया कि ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं और लोग अभी भी इस खतरनाक मांझे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पहले भी लग चुका है प्रतिबंध
कोर्ट ने याद दिलाया कि 19 नवंबर 2015 में भी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चाइनीज मांझा (सिंथेटिक/ग्लास कोटेड नायलॉन धागा) के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाई थी। उस समय सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि इस पर सख्ती से अमल कराएं। लेकिन 10 साल बाद भी स्थिति वैसी ही है। बाजारों में यह आसानी से मिल रहा है और लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि पुराने आदेश का पालन नहीं हुआ, इसलिए अब दोबारा सख्त निर्देश देना पड़ रहा है।
कोर्ट ने सरकार से क्या कहा?
खंडपीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट आदेश दिया कि पूरे उत्तर प्रदेश में, खासकर जौनपुर सहित सभी जिलों में चाइनीज मांझा बनाने, बेचने और इस्तेमाल करने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो। कोर्ट ने पुराने 2015 के आदेश को दोहराते हुए कहा कि इसका सख्ती से पालन होना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता शिवा प्रिया प्रसाद ने बहस की। कोर्ट का कहना है कि पतंग उड़ाने का मजा तो ठीक है, लेकिन जान जोखिम में डालकर नहीं। यह मांझा इतना घातक है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी बन जाती है।

















