नई दिल्ली में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने कमान संभाल ली है। दो दिन पहले ही उन्होंने पदभार ग्रहण किया है। इस मौके पर अपने पहले संबोधन में गोर ने हिन्दी में ‘नमस्ते’ से बात शुरू करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच मित्रता वास्तविक है। इतनी कि दोनों के बीच किसी बिन्दु पर असहमति हो तो भी मतभेद सुलझा लिए जाते हैं। गोर ने भारत को अमेरिका का सबसे अहम रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों की साझेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। नए अमेरिकी राजदूत ने उम्मीद जताई कि ट्रंप एक—दो साल में भारत का दौरा कर सकते हैं। उनके आने से द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
क्या है मिशन 500
भारत और अमेरिका के बीच संबंध, विशेष रूप से 2025 में ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से काफी सुधरे हैं। फरवरी 2025 के संयुक्त वक्तव्य में ट्रंप और मोदी ने ‘मिशन 500’ लक्ष्य निर्धारित किया था। इसका उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करते हुए 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। हालांकि, व्यापार घाटे और टैरिफ विवादों ने इस बीच काफी तनाव पैदा किया है। जैसे, अमेरिका ने भारतीय कपड़े और फार्मास्यूटिकल्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। राजदूत गोर का बयान इन मतभेदों के रहते हुए भी आगे के लिए सकारात्मक संदेश प्रतीत होता है।
भारत—अमेरिका व्यापार समझौता
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 2025 के प्रमुख आयाम दोनों देशों के आर्थिक हितों को संतुलित करने पर केंद्रित हैं। जैसे, टैरिफ में कमी। अमेरिका ने भारतीय कपड़ा, दवा और श्रम-प्रधान निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ कम करने का वादा किया है, जबकि भारत ने अमेरिकी कृषि, डेयरी और औद्योगिक वस्तुओं पर उच्च टैरिफ घटाए हैं।

इसी तरह भारत को अमेरिकी बाजार में आकलन के आधार पर मांगी गई पहुंच मिलेगी, विशेष रूप से फार्मा और कपड़ा क्षेत्रों में यह पहुंच भारत के लिए लाभकारी होगी, जबकि अमेरिका को भारत में कृषि उत्पादों के लिए बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
इस समझौते के तहत, दोनों पक्ष आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने, एफडीआई बढ़ाने (2023-24 में अमेरिका से 4.99 अरब डॉलर) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर सहयोग करेंगे। इसमें कृषि व्यापार बढ़ाने, निर्यात नियंत्रण पर सख्ती करने और उच्च तकनीक व्यापार को प्रोत्साहन देने जैसे आयाम हैं। ये बिंदु व्यापार नीति फोरम की बैठकों में चर्चा से निकले हैं। ये फौरम ही असल में विवाद सुलझाने के मंच हैं।
देखा जाए तो ट्रंप का आगामी प्रस्तावित दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकता है। राजदूत गोर के अनुसार, यह दोस्ती का प्रतीक होगा और व्यापार वार्ताओं को गति प्रदान करेगा। इससे पिछले दौरे, जैसे ‘हाउडी मोदी’ जैसे कार्यक्रम की यादें ताजा होंगी। ट्रंप का वह दौरा ‘मिशन 500’ को अमल में लाने, रक्षा सहयोग बढ़ाने और इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूत करने का अवसर बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन के असर को भी संतुलित करने का काम करेगा।
इसमें संदेह नहीं है कि भारत में अमेरिका के नए राजदूत गोर का बयान सकारात्मकता भरा है। लेकिन यह भी है कि भारत को अपने श्रम-प्रधान क्षेत्रों की रक्षा करनी होगी, जबकि अमेरिका निवेश आकर्षित करने पर जोर देगा। इन मुद्दों को सुलझाने में गोर की अहम भूमिका होगी। गोर का यह बयान दर्शाता है कि मतभेदों के बावजूद, भारत-अमेरिका साझेदारी आज की भूराजनीति में एक अलग महत्व रखती है। दोनों देश वैश्विक चुनौतियों, जैसे जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद से निपटने के लिए एकजुट हैं। भविष्य में ये संबंध और मजबूत होंगे, जिससे बेशक, वैश्विक अर्थव्यवस्था को लाभ ही होगा।

















