ईरान में बीते 17 दिनों से चल रहे देश व्यापी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका में हलचल बढ़ गई है। जिस प्रकार से ईरान की खामेनेई सरकार प्रदर्शन को कुचलने की कोशिशों में लगी हुई है, उसे देखते हुए पेंटागन में ईरान में हमले की तैयारी तेज हो गई है। डोनाल्ड लगातार बैठकें कर रहे हैं। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ हवाई हमलों को विकल्प के रूप में खुले रखे हुए हैं। उसने मिडिल ईस्ट में अपने सारे सैन्य अड्डों को एक्टिव कर रखा है। कभी भी अमेरिका हमला कर सकता है।
व्हाइट हाउस का बयान
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने साफ कहा है कि ट्रंप ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें हवाई हमले भी शामिल हैं। प्रेस सेक्रेटरी करोलाइन लेविट ने सोमवार को कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा सभी विकल्प खुले रखते हैं। हवाई हमले कमांडर-इन-चीफ के लिए कई विकल्पों में से एक हैं।” उन्होंने जोड़ा कि “कूटनीति हमेशा राष्ट्रपति की पहली पसंद होती है।” लेकिन ट्रंप जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई से नहीं हिचकते, और ईरान को यह अच्छे से पता है।
ट्रंप ने खुद पहले कहा था कि सेना कुछ संभावित कार्रवाइयों की समीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा, “सेना इसे देख रही है, और हमारे पास कुछ बहुत मजबूत विकल्प हैं। हम फैसला करेंगे।” ट्रंप ने यह भी वादा किया है कि अगर ईरानी अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला करेंगे, तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा।
ईरान में क्या हो रहा है
ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वजह है बिगड़ती आर्थिक हालत, बहुत ज्यादा महंगाई और रियाल की गिरती कीमत। ये शुरूआत तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई और अब सभी 31 प्रांतों में फैल गई है। लाखों लोग सड़कों पर उतरे हैं, जो राजनीतिक बदलाव चाहते हैं और इस्लामिक रिपब्लिक के शासन के खत्म होने की मांग कर रहे हैं।
सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर लाइव गोली, आंसू गैस और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की हैं। सैकड़ों लोग मारे गए हैं और दर्जनों घायल हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि 2022 के बाद से यह सबसे खूनी विरोध हैं। ईरानी सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया है और विदेशी ताकतों पर दखल देने का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला
यह सब जून 2025 में अमेरिका के नेतृत्व में ईरान के तीन न्यूक्लियर सुविधाओं पर हवाई हमलों के बाद का है। अमेरिका ने कहा था कि ये हमले तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को धीमा करने के लिए थे। ईरान ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और कहा कि उसके न्यूक्लियर साइट्स का काम जारी रहेगा। अब ये विरोध और अमेरिका की तरफ से सैन्य विकल्पों की बात के बीच तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप प्रशासन कूटनीति को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने को तैयार दिख रहा है।

















