नई दिल्ली: नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में निःशुल्क प्रवेश आगंतुकों को खासा आकर्षित कर रहा है। भारत मंडपम में आयोजित इस मेले में पुस्तक प्रेमियों की रिकॉर्ड उपस्थिति देखी जा रही है। सुबह से ही छात्र, पाठक और युवा अपने दोस्तों एवं परिजनों के साथ बड़ी संख्या में परिसर में पहुंच रहे हैं। यह पुस्तक मेला पुस्तकों और विचारों के जीवंत सार्वजनिक उत्सव में परिवर्तित हो रहा है।
मेले के प्रमुख आकर्षणों में से एक ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा@75’ थीम पवेलियन विशेष रूप से चर्चा में रहा। आर्मी टैंकों की वास्तविक आकार की प्रतिकृतियां और विभिन्न हॉलों में वर्दीधारी सैन्य कर्मियों की उपस्थिति प्रमुख सेल्फी पॉइंट बन रही है। इस पवेलियन ने सभी आयु वर्ग के दर्शकों को आकर्षित करते हुए मेले को एक मजबूत विजुअल एक्सपीरिएंस प्रदान किया।

सोमवार को पुस्तक मेले में विशिष्ट अतिथियों में जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) इंडियन आर्म्ड फोर्सेज,आर. एन. रवि, माननीय राज्यपाल, तमिलनाडु, हेमा मालिनी, वरिष्ठ अभिनेत्री एवं लोकसभा सांसद तथा स्मृति ईरानी, पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल रहीं। थीम पवेलियन का भ्रमण करते हुए जनरल अनिल चौहान ने इसकी संकल्पना और प्रस्तुति की सराहना की। वहीं थीम पवेलियन में आयोजित सत्र में सुश्री स्मृति ईरानी ने नेतृत्व, जनसेवा और जमीनी स्तर से राष्ट्रीय जिम्मेदारी तक की यात्रा पर अपने विचार साझा किए। वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं प्रख्यात वक्ता स्मृति ईरानी ने भारत लिटरेचर फेस्टिवल के एक विशेष सत्र ग्रासरूट टू दि हेल्म : ए जर्नी ऑफ लीडरशिप विद स्मृति ईरानी में भाग लिया। उन्होंने आयोजकों को बधाई देते हुए नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले के इतिहास में यह पहली बार है जब दर्शन और शौर्य का एक साथ उत्सव मनाया जा रहा है, जिसे उन्होंने साहित्य और प्रौद्योगिकी का अनोखा संगम बताया।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि साहित्य और विचार केवल पढ़ने के साधन नहीं हैं, बल्कि यह जीवन को समझने और जीने के नया तरीका सिखाते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सामग्री ग्रहण करने के माध्यम भले ही बदल गए हों, लेकिन विचारों की शक्ति एवं प्रभाव आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। इसके पश्चात सुश्री हेमा मालिनी कवि दास नारायण की कृष्ण भक्ति पर आधारित काव्य रचनाओं पर आयोजित दूसरे सत्र का हिस्सा बनीं। ‘कविवर दास नारायण के कृष्ण भक्ति पद’ विषयक इस कार्यक्रम में श्री अरुण माहेश्वरी और श्री विमलेश कांति वर्मा की उपस्थिति रही, जबकि हेमा मालिनी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
सुश्री हेमा मालिनी ने कहा कि यह केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं, बल्कि भक्ति काव्य और आध्यात्मिक अनुभूति का उत्सव है। यह कृति उस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिसकी जड़ें सूरदास और मीराबाई जैसे महान कवियों में मिलती हैं। मेले के तीसरे दिन किड्ज़ एक्सप्रेस ने बच्चों को कहानियों, पात्रों और रचनात्मकता की दुनिया की सैर कराई। दिन भर विभिन्न रोचक और शिक्षाप्रद गतिविधियों में 2,500 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। “रंग दो दुनिया सारी” लिखी एक दीवार बच्चों (और बड़ों) की डूडल्स, रंगों और ठहाकों से जीवंत हो उठी, जहां सभी ने लाइफ साइज कैनवस पर रंग भरकर अपनी कल्पनाओं को अभिव्यक्त किया।

















