पश्चिम बंगाल में अभी स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची की खास गहन समीक्षा चल रही है। ये काम चुनाव आयोग कर रहा है, ताकि वोटर लिस्ट में फर्जी नाम, मृत लोगों के नाम या गलत एंट्री हटाई जा सके और चुनाव साफ-सुथरे हों। लेकिन इसी को लेकर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये काम बिना किसी प्लानिंग के हो रहा है, बहुत संवेदनहीन और अमानवीय है। उनके इन आरोपों पर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के आरोपों को खारिज करते हुए उसे “निराशाजनक और राजनीतिक रूप से प्रेरित” करार दिया है।
उन्होंने दावा किया कि इससे डर, दबाव और ज्यादा काम के बोझ की वजह से अब तक 77 लोगों की मौत हो चुकी है, 4 लोगों ने सुसाइड की कोशिश की और 17 लोग अस्पताल में भर्ती हुए। ममता ने इसे डराने-धमकाने वाला माहौल बताया और कहा कि ये प्रक्रिया लोगों के लिए बहुत भारी पड़ रही है।
सुवेंदु अधिकारी का जवाब
इसी पर विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखकर ममता बनर्जी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने ममता के पत्र को “निराशाजनक और राजनीतिक रूप से प्रेरित” यानी हताशा और राजनीतिक मकसद से भरा हुआ बताया। सुवेंदु का कहना है कि ये प्रक्रिया राज्य में साफ और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का बहुत जरूरी कदम है।
उनका आरोप है कि SIR चलने से मतदाता सूची में छिपी कमजोरियां सामने आ रही हैं, खासकर ट्रिनमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें पैदा हो रही हैं। सुवेंदु कहते हैं कि सालों से फर्जी वोटर, मर चुके लोगों के नाम और सीमा पार से आए घुसपैठियों को जोड़ा गया था, जिससे TMC को फायदा होता रहा। अब ये सब खुल रहा है, इसलिए ममता परेशान हैं और प्रक्रिया को रोकने या कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।
मौतों पर क्या कहा?
सुवेंदु ने ममता द्वारा बताई गई 77 मौतों, सुसाइड की कोशिशों और अस्पताल में भर्ती होने की बात को बेबुनियाद और बढ़ा-चढ़ाकर बताया। उनका कहना है कि इनमें से किसी भी घटना को SIR से सीधे जोड़ने का कोई ठोस सबूत नहीं है। कई मामलों में तो ये घटनाएं पहले से जुड़ी हुई हैं या बिल्कुल अलग वजहों से हुईं। उन्होंने कहा कि ऐसी त्रासदियों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है और इससे असली पीड़ित परिवारों का अपमान होता है।
SIR पर भी बोले
सुवेंदु ने ये भी समझाया कि SIR कोई सजा देने वाला काम नहीं है, बल्कि सिर्फ सत्यापन का प्रोसेस है। अगर किसी को कोई असुविधा हो रही है, तो उसके लिए अपील करने का पूरा सिस्टम मौजूद है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का रवैया बिल्कुल निष्पक्ष है और कोई भी इससे ऊपर नहीं है। महिलाओं के शादी के बाद सरनेम बदलने या प्रवासी मजदूरों के बारे में उठाए गए सवालों को भी उन्होंने बढ़ा-चढ़ाकर बताया। उनका कहना है कि ये प्रक्रिया पूरे राज्य में एक समान और डेटा के आधार पर चल रही है, किसी खास इलाके या समूह को निशाना नहीं बनाया जा रहा।
















