ओडिशा के मयूरभंज जिले से सनातन धर्म में घर वापसी का मामला प्रकाश में आया है। जहां 30 वनवासी परिवारों के जहां 151 लोगों ने ईसाईयत को त्याग करते हुए सनातन धर्म में घर वापसी कर ली है। ये सभी लोग थाकुरमुंडा ब्लॉक के बागदफा, जमनंदा और डंगदिहिया गांवों में हुआ।
कई वर्ष पहले बना दिए गए थे ईसाई
ये परिवार संथाल, हो और गोंड जनजातियों से हैं। कई साल पहले ये लोग ईसाई बन गए थे। वजह बताई गई है कि मिशनरियों ने उन्हें कहा था कि बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए ईसाई धर्म अपनाओ, तो ठीक हो जाएंगे। स्वास्थ्य संबंधी झूठे वादों के चलते कन्वर्शन हो गया। लेकिन बाद में इन्हें लगा कि इससे उनकी संस्कृति, परंपराएं और सामाजिक रिश्ते टूट गए। गांव के त्योहार, रस्में, सामूहिक आयोजन में शामिल नहीं हो पाए। इससे मानसिक परेशानी हुई और पुरखों की पहचान खोने जैसा दुख हुआ।
हिन्दू संगठनों ने इन लोगों की घर वापसी करवाई। उन्होंने समझाया कि बीमारी का इलाज मेडिकल तरीके से हो सकता है, धर्म बदलने की जरूरत नहीं। साथ ही बताया कि कन्वर्जन से जनजातीय संस्कृति और परंपराएं कैसे कमजोर होती हैं। परिवारों ने बात समझी और वापस लौटने का फैसला किया।
कार्यक्रम में पारंपरिक रस्में हुईं। समारोह में सैकड़ों आदिवासी भाई-बहन शामिल हुए। बागदफा और डंगदिहिया में स्वागत समारोह हुआ, जहां इन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की कमान गोविंद चंद्र महंता ने संभाली। एक परिवार के सदस्य बंशीधर कलुंडिया ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने समझाया कि स्वास्थ्य की समस्या के लिए धर्म बदलना जरूरी नहीं, इलाज से ठीक हो सकता है। बात सुनने के बाद हमने फैसला किया। अब हमें गर्व महसूस हो रहा है, पुरानी परंपराओं से जुड़कर अच्छा लग रहा है।
ओडिशा में लगातार हो रहा अवैध कन्वर्जन
स्थानीय कार्यकर्ता शिबा प्रसाद हेम्ब्रम ने कहा कि ओडिशा में अवैध कन्वर्जन हो रहे हैं। यहां की एंटी-कन्वर्जन कानून सख्ती से लागू नहीं हो रहा। इससे जनजातीय समुदाय की संस्कृति खतरे में पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि कानून को मजबूती से लागू किया जाए ताकि आदिवासियों को उनकी जड़ों से न काटा जाए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री बिश्वेश्वर टुडू भी मौजूद थे। उन्होंने परिवारों का स्वागत किया। कहा कि स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी जैसे नेता कन्वर्जन के खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की परंपराएं बहुत मजबूत हैं, लेकिन कुछ ताकतें उन्हें धर्म बदलवाकर उनकी संस्कृति से दूर करना चाहती हैं। हमें सतर्क रहना होगा और एकजुट होकर अपनी विरासत बचानी होगी।
हो समुदाय के धार्मिक नेता मनय पूर्ति ने कार्यक्रम में आशीर्वाद दिया। समारोह में कई अन्य लोग भी शामिल थे, जैसे डॉ. चंदन मुर्मू (पूर्व सीडीएमओ), भीमचरण माझी, रामचंद्र साहा, बैशाखु सरदार, घनश्याम महंत, कौशिक साहू, चैतन्य अल्दा आदि। सबने आदिवासी संस्कृति और पहचान बचाने पर जोर दिया। यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से हुआ। पूरा माहौल एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का था। लोग अपनी जड़ों से फिर जुड़कर खुश नजर आए।
















