अमेरिका ने हाल ही में दो बड़े कदम उठाए हैं, जो उसकी विदेश नीति में सख्ती और ताकत के इस्तेमाल को दिखाते हैं। एक तरफ यूएस नेवी ने यूरोपीय पानी में एक रूसी झंडे वाला ऑयल टैंकर जब्त कर लिया, जो वेनेजुएला से तेल लेकर जा रहा था। दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड पर कब्जा या खरीदने की बात जोर-शोर से कर रहा है। ये दोनों घटनाएं 7 जनवरी 2026 को सामने आईं।
रूसी झंडे वाले टैंकर की जब्ती
ये टैंकर पहले Bella 1 नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर मरिनेरा कर दिया गया और रूसी झंडा लगा लिया गया। अमेरिका ने इसे 2024 में ही सैंक्शंस के तहत ब्लैकलिस्ट कर दिया था, क्योंकि ये “शैडो फ्लीट” का हिस्सा था जो वेनेजुएला, ईरान या रूस से सैंक्शन वाले तेल को चुपके से ले जाता है।
टैंकर पिछले महीने वेनेजुएला के पास से निकला था। अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसे कैरिबियन में रोकने की कोशिश की, लेकिन जहाज भाग निकला। फिर ये अटलांटिक महासागर पार करके यूरोप की तरफ बढ़ा। अमेरिका ने इसे दो हफ्ते से ज्यादा ट्रैक किया। USCGC Munro नाम के जहाज ने इसकी निगरानी की। आखिरकार 7 जनवरी को नॉर्थ अटलांटिक में, आइसलैंड और स्कॉटलैंड के बीच के इलाके में यूएस फोर्सेस ने इसे बोर्ड कर लिया।
ऑपरेशन में हेलिकॉप्टर से सैनिक उतारे गए और जहाज पर कब्जा कर लिया गया। कोई हिंसा नहीं हुई। अमेरिका इसे “स्टेटलेस” मान रहा है, भले रूस ने इसे अपना रजिस्टर में डाल लिया हो। रूसी सबमरीन और वॉरशिप पास में थीं, लेकिन अमेरिका ने पहले ही कार्रवाई कर ली। डिफेंस सेक्रेटरी पेटे हेगसेथ ने कहा, “सैंक्शन वाले और गैरकानूनी वेनेजुएला तेल की ब्लॉकेड पूरी तरह लागू है – दुनिया में कहीं भी।” होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने इसे “घोस्ट फ्लीट” टैंकर बताया और कहा कि दोनों जहाज वेनेजुएला से जुड़े थे। एक दूसरा टैंकर M/T Sophia को भी कैरिबियन में उसी दिन पकड़ा गया।
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रूस ने इसे “पाइरेसी” कहा और मांग की कि जहाज पर सवार रूसी नागरिकों के साथ अच्छा बर्ताव हो और उन्हें जल्दी घर भेजा जाए। रूस का कहना है कि जहाज उसके कानून के मुताबिक रजिस्टर्ड है।
ग्रीनलैंड पर अमेरिका की नजर
इसी बीच ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को खरीदने या किसी तरह हासिल करने की बात कर रहा है। व्हाइट हाउस के अधिकारी स्टीफन मिलर ने CNN पर कहा कि दुनिया ताकत, फोर्स और पावर से चलती है। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप इसे खरीदना चाहते हैं, इनवेड नहीं। लेकिन व्हाइट हाउस की प्रवक्ता करोलाइन लेविट ने कहा कि मिलिट्री इस्तेमाल हमेशा एक ऑप्शन है। ट्रंप 1951 के अमेरिका-डेनमार्क एग्रीमेंट का हवाला दे रहे हैं, जिसमें ग्रीनलैंड में यूएस बेस की इजाजत है। 2004 में अपडेट हुआ कि बड़े बदलाव के लिए बातचीत जरूरी है।
लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड बिकने के लिए नहीं है। उनकी अपनी विदेश नीति और डिफेंस है। अमेरिकी सीनेटर्स जेने शाहीन और थॉम टिलिस ने कहा कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड की बात माननी चाहिए और संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। ये कदम “अमेरिका फर्स्ट” पॉलिसी के तहत हैं, जहां ताकत से हितों की रक्षा की बात है।
















