भारत जैसे देशों में चिकित्सा सुविधाओं को लेकर और साथ ही यहाँ पर चल रही कथित अव्यवस्थाओं को लेकर विदेशी मीडिया भारत पर हमलावर रहता है और साथ ही वह यह भी साबित करने में लगा रहता है कि कैसे भारत में लगातार लोग चिकित्सा अव्यवस्थाओं के कारण दम तोड़ रहे हैं, मगर वे कभी भी कथित विकसित देशों की चिकित्सीय अव्यवस्था पर प्रश्न नहीं उठाते हैं। वे तमाम नकारात्मक रिपोर्ट्स को छिपा ले जाते हैं और चर्चा भी नहीं करते हैं, जैसे हाल ही में कनाडा में हुआ था। कनाडा में एक भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक की मृत्यु केवल इलाज के इंतजार में हो गई थे। वह बात थी कनाडा की, अभी ब्रिटेन को लेकर भी एक ऐसी ही रिपोर्ट आई है।
6000 से अधिक लोगों की मौत
express.co.uk की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन की सोशल केयर अर्थात सामाजिक देखभाल में आपदा के कारण पिछले वर्ष 6000 से ज्यादा लोग केवल इसलिए मौत का शिकार बन गए हैं, क्योंकि इस विषय में निर्णय ही नहीं लिया जा सका कि क्या इन लोगों को तात्कालिक सहायता की आवश्यकता है या नहीं? ये आँकड़े यह भी दिखाते हैं कि वयस्कों को सहायता के लिए कितनी समस्या होती है। अब इन आंकड़ों पर राजनीति तेज हो गई है, और विपक्षी सांसदों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से कहा है कि वे इस समस्या का हल जल्दी निकालें।
वर्ष 2021 में भी हैरान करने वाले आँकड़े आए थे
वर्ष 2021 में ऐसे ही आँकड़े सामने आए थे। गार्डीअन की एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन में 70,000 से ज्यादा लोग सोशल एडल्ट केयर मिलने के इंतजार में ही मौत की नींद सो सकते थे। इसके अनुसार “एक एनालिसिस से पता चला है कि बोरिस जॉनसन द्वारा इस हफ़्ते बताए गए बदलाव लागू होने से पहले इंग्लैंड में लगभग 70,000 लोगों की एडल्ट सोशल केयर मिलने का इंतज़ार करते हुए मौत हो सकती है।“ यह वर्ष 2021 के आँकड़े थे। उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि इस सोशल केयर आपदा से निबटने के लिए 1.25% का कर लगाया जाएगा और इसे लेकर आलोचना भी हुई थी। जब इस पर संसद में बहस होने वाली थी, तभी यह अनुमान लगाया गया था कि “अक्टूबर 2023 में खर्च पर £86,000 की लिमिट लागू होने से पहले, सोशल केयर का इंतज़ार करते हुए 69,950 वयस्कों की मौत होने की आशंका है!”
इसके अतिरिक्त इसमें आगे लिखा था कि “जुलाई 2019 और इस महीने के बीच के 26 महीनों में सोशल केयर का इंतज़ार करते हुए 72,883 और वयस्कों की मौत होने की आशंका है!” ये आँकड़े NHS डिजिटल की एडल्ट सोशल केयर एक्टिविटी और फाइनेंस रिपोर्ट से निकाले गए थे।“
70,000 से ज्यादा लोग केवल इसलिए मारे जा सकते थे क्योंकि यह निर्णय नहीं लिया जा सकता था कि क्या उन्हें सोशल केयर मिलनी चाहिए या नहीं?
कीर स्टार्मर का बयान
वर्ष 2025 की इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से कहा गया है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस समस्या का समाधान करें। लिबरल डेमोक्रेट हेल्थ स्पोक्सपर्सन हेलेन मॉर्गन ने कहा: “उन्हें खुद इस संकट को संभालना होगा, इस लापरवाही को खत्म करना होगा और आखिरकार यह दिखाना होगा कि वह किसके पक्ष में हैं। यह एक राष्ट्रीय त्रासदी है कि 6,000 बुजुर्ग और कमजोर लोग देखभाल के लिए वेटिंग लिस्ट में फंसे रहने के दौरान मर गए।” यह वास्तव में राष्ट्रीय त्रासदी ही है कि लोग केवल इलाज के लिए वेटिंग लिस्ट के कारण ही मर जाएं?
इस रिपोर्ट में लिखा है कि आधिकारिक आँकड़े यह दिखाते हैं कि 6200 लोग, जिन्होनें सोशल केयर का अनुरोध किया था और उनकी मृत्यु पिछले वर्ष हो गई, वे केवल इसलिए मारे गए क्योंकि यह निर्णय ही नहीं लिया जा सका कि क्या उन्हें इलाज दिया जाना चाहिए या नहीं। इससे भी भयावह यह है कि इसी दौरान, लगभग 900,000 वयस्कों की सोशल केयर के अनुरोध को नकार दिया गया और कई लोगों को इसके बजाय “जानकारी या सलाह” दी गई।
इन आंकड़ों का पता तब चला जब सांसदों की एक जांच में पाया गया कि 3.5 मिलियन वयस्कों को वह देखभाल नहीं मिल रही है जिसकी उन्हें आवश्यकता है और इसके कारण वे अपनी ज़िंदगी पूरी तरह से जीने के बजाय बस जैसे-तैसे जी रहे हैं” क्योंकि पिछली सरकारें इस पर कोई कार्रवाई करने में नाकाम रहीं।“
सोशल मीडिया पर फिर छिड़ी बहस
इसे लेकर अब एक बार फिर से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। लोग प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर ब्रिटेन के लोग इस प्रकार इलाज के न मिलने का शिकार हो रहे हैं तो वहीं बाहर से आए अवैध शरणार्थी सरकारी मदद पा रहे हैं। आखिर सरकार के लिए कौन महत्वपूर्ण है? कई लोगों ने इस रिपोर्ट को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा कि यह उनके परिजनों के साथ हुआ है।











