तमिलनाडु की डीएमके सरकार के तुष्टिकरण की राजनीति को हाई कोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम जलाने को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। मदुरै हाई कोर्ट ने इस मामले में अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है, जिसके तहत याचिकाकर्ता को प्राचीन पत्थर के स्तंभ (जिसे दीपथून या दीप स्तंभ कहते हैं) पर दीपक जलाने की इजाजत मिल गई है।
मामला क्या है?
थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी भगवान मुरुगन के छह पवित्र स्थानों में से एक है। यहां अरुलमिगु सुब्रमण्या स्वामी मंदिर है, जो बहुत पुराना और प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। इसी पहाड़ी पर एक दरगाह (सिकंदर बादशाह दरगाह) भी है। दोनों जगहों की दूरी करीब 15-20 मीटर के आसपास है। पहाड़ी पर एक प्राचीन पत्थर का स्तंभ है, जिसे ‘दीपथून’ कहते हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार, कार्तिगई दीपम के दिन यहां दीपक जलाने की पुरानी रस्म रही है। यह परंपरा सैकड़ों साल से चली आ रही है, और आगम शास्त्रों के हिसाब से भी यह मंदिर की रीतियों में शामिल है। मंदिर प्रशासन और भक्तों का कहना है कि यह स्तंभ खासतौर पर दीपक जलाने के लिए ही बनाया गया था।
लेकिन डीएमके सरकार के अधिकारियों ने हाई कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए हिन्दुओं को दीप प्रज्वलित नहीं करने दिया। इसके पीछे उनका तर्क था कि इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, क्योंकि दोनों समुदायों के बीच पहले से तनाव है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह पूरा मामला हिंदू तमिल पार्टी के नेता राम रविकुमार की याचिका से शुरू हुआ। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि कार्तिगई दीपम के दिन इस स्तंभ पर पारंपरिक तरीके से दीपक जलाया जाए। पिछले साल 1 दिसंबर 2025 को मदुरै हाई कोर्ट के जस्टिस जी.आर. स्वामिनाथन ने इस याचिका पर सुनवाई की और आदेश दिया कि दीपक जलाया जाए। कोर्ट ने इसे धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक अधिकार से जुड़ा मामला माना।
लेकिन सरकारी अधिकारी और पुलिस ने इस आदेश को लागू नहीं किया। उनका डर था कि इससे मंदिर और दरगाह के बीच झगड़ा हो सकता है। नतीजा यह हुआ कि 2025 का कार्तिगई दीपम बिना पहाड़ी पर दीपक जलाए गुजर गया। भक्तों में काफी नाराजगी हुई, और कुछ जगहों पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए।
हाई कोर्ट का नया फैसला
अब मदुरै हाई कोर्ट की जस्टिस जी. जयचंद्रन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, मंदिर प्रशासन, पुलिस, वक्फ बोर्ड और दरगाह की तरफ से दाखिल अपीलों पर सुनवाई की। कोर्ट ने 6 जनवरी 2026 को फैसला सुनाया कि जस्टिस स्वामिनाथन का पुराना आदेश बिल्कुल सही है और इसे बरकरार रखा जाता है। कोर्ट ने साफ कहा कि अपील करने वालों के पास कोई मजबूत सबूत नहीं है कि आगम शास्त्रों में इस जगह पर दीपक जलाना मना है। स्तंभ मंदिर के हिस्से में आता है। साथ ही कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर ‘काल्पनिक’ है।
इतने बड़े राज्य को यह डरना हास्यास्पद है कि एक दिन सिर्फ दीपक जलाने से शांति भंग हो जाएगी। कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को निर्देश दिया कि वे दीपथून पर दीपक जलाएं। प्रशासन को सुरक्षा की पूरी व्यवस्था करनी होगी। चूंकि यह पुराना स्मारक है, इसलिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) से सलाह लेकर कुछ शर्तें लगा सकते हैं, जैसे कितने लोग जा सकते हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान होना चाहिए। दीपक ऊंची जगह पर जलता है ताकि नीचे खड़े भक्त दूर से देखकर पूजा कर सकें। यह सिर्फ रोशनी की बात है, लड़ाई की नहीं।











