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ऐसा मंदिर जहां मां की शक्ति के आगे औरंगजेब ने भी सिर झुका लिया था- उस मंदिर की कहानी जानिये

मां की शक्ति के आगे औरंगजेब को भी नतमस्तक होना पड़ा। लाख कोशिश के बाद भी औरंगजेब और उसकी सेना इस मंदिर को नहीं तोड़ पाई और आखिर में उसने घुटने टेक लिए।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Jan 5, 2026, 10:06 am IST
in यात्रा

औरंगजेब क्रूर मुगल बादशाह था। उसने कई हिंदू मंदिरों को तोड़ा। सिखों और हिंदुओं के प्रति उसके जेहन में नफरत भरी हुई थी। उसने काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा का केशवदेव मंदिर और सोमनाथ मंदिर जैसे कई हिंदू मंदिरों को ढहाने का आदेश दिया। लेकिन एक मंदिर में मां की शक्ति के आगे औरंगजेब को भी नतमस्तक होना पड़ा। लाख कोशिश के बाद भी औरंगजेब और उसकी सेना इस मंदिर को नहीं तोड़ पाई और आखिर में उसने घुटने टेक लिए। आइए इस मंदिर की कहानी जानते हैं।

इस मंदिर को तोड़ने आए औरंगजेब को उल्टे पांव भागना पड़ा
यह मंदिर राजस्थान के सीकर में है। सीकर से करीब 35 किमी दूर अरावली की वादियों में बसा है यह मंदिर जीण माता का मंदिर है। जिनकी शक्ति के आगे औरंगजेब ने शीश झुका दिया था। यहां के पुजारियों का कहना है कि औरंगजेब हिंदू मंदिरों को तोड़ते हुए जीण माता मंदिर पहुंचा और जैसे ही इस मंदिर को तोड़ने के लिए आगे बढ़ा भंवरों (मधुमक्खियों) ने उसपर और उसकी सेना पर हमला कर दिया।

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औरंगजेब इस मंदिर को नहीं तोड़ पाया और गंभीर रूप से बीमार हो गया। वह यहां से जान बचाकर भागा। इसके बाद औरंगजेब ने मंदिर पर हमले की अपने करतूत पर अफसोस जताते हुए जीण माता से माफी मांगी और उनके दरबार मे शीश झुकाया। यह भी कहा जाता है कि इसके बाद उसने यहां की शक्ति को देखकर हर महीने सवा मण घी तेल भेंट करने का वचन दिया। इसके बाद उसकी तबीयत ठीक हुई और वह क्रूर बादशाह इस मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा पाया।

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जीण माता की कहानी?
कहा जाता है कि जीण का जन्म चूरू जिले घांघू गांव के एक चौहान वंश के राजा के घर में हुआ था। उनका एक बड़ा भाई भी था हर्ष। दोनों भाई बहनों में अटूट प्यार था। जीण को शक्ति व हर्ष को भगवान शिव का रूप माना गया है। एक बार जीण अपनी भाभी के साथ पानी भरने सरोवर पर गई हुई थीं। दोनों में इसी बात को लेकर पहले तो बहस हुई और शर्त लगी कि हर्ष सबसे अधिक किसे मानते हैं।

शर्त लगी कि जिसके सिर पर रखा मटका हर्ष पहले उतारेगा उसे ही सबसे अधिक प्यारा मानते हैं ऐसा माना जाएगा। हर्ष ने सबसे पहले अपनी पत्नी के सिर पर रखा मटका उतारा और जीण शर्त हार गई। इसके बाद वो नाराज हो गई और अरावली के काजल शिखर पर नाराज हो कर जा बैठी और तपस्या करने लगी। हर्ष मनाने गया लेकिन जीण नहीं लौटी और भगवती की तपस्यी में लीन रही। कहते हैं कि बहन को मनाने के लिए हर्ष भी भैरों की तपस्या में लीन हो गया। दोनों की तपस्या स्थली जीणमाता धाम और हर्षनाथ भैरव के रूप में जानी जाती है। इस मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

 

Topics: the story of Jeen Mata TempleAurangzeb could not destroy Jeen Mata Templemiracles of Jeena Mata Templeजीण माता मंदिरजीण माता मंदिर राजस्थानजीण माता मंदिर की कहानीऔरंगजेब नहीं तोड़ पाया जीण माता मंदिरजीण माता मंदिर के चमत्कारJeen Mata TempleJeen Mata Temple in Rajasthan
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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