तेल के गंदे खेल में आखिरकार अमेरिका ने वेनेजुएला को सेना के दम पर कब्जा ही लिया। उसने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला की राजधानी काराकास में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया। अब दोनों को अमेरिका ले जाया गया है। जहां उन पर ड्रग ट्रैफिकिंग और संबंधित आरोपों में मुकदमा चलाने की तैयारी है।
काराकास में क्या हुआ
रात के करीब 2 बजे (स्थानीय समय) से धमाके शुरू हुए। लोग अचानक जाग गए। आसमान में कम ऊंचाई पर हेलीकॉप्टर और प्लेन उड़ते दिखे। मुख्य टारगेट मिलिट्री जगहें थीं – ला कार्लोटा एयरफील्ड (शहर के बीच में) और फ्यूएर्ते ट्यूना बेस (जहां मादुरो रहते थे, ऐसा माना जाता था)। इन जगहों से धुआं उठता देखा गया। कुछ इलाकों में बिजली भी चली गई।
धमाके सिर्फ काराकास तक सीमित नहीं थे। वेनेजुएला सरकार ने कहा कि मिरांडा, ला ग्वायरा और अरागुआ स्टेट्स में भी हमले हुए। एक अनाम वेनेजुएला अधिकारी ने बताया कि कम से कम 40 लोग मारे गए – इसमें आम नागरिक और सैनिक दोनों शामिल हैं। एक महिला रोसा गोंजालेज अपने अपार्टमेंट में मारी गईं, जबकि एक और रहने वाला गंभीर रूप से घायल हुआ।
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अमेरिका की तरफ से क्या कहा गया
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मार-ए-लागो में प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे “शानदार ऑपरेशन” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला को “चलाएगा”। अमेरिकी ऑयल कंपनियां वहां के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने में अरबों डॉलर लगाएंगी। ट्रंप ने एक ऑयल एम्बार्गो भी लगाने की बात कही।
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने मादुरो, उनकी पत्नी और बेटे के खिलाफ नया इंडिक्टमेंट जारी किया – ड्रग ट्रैफिकिंग, हथियार और साजिश के आरोप में। ये 2020 के पुराने केस से जुड़ा है। अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने कहा कि वे जल्द अमेरिकी कोर्ट में जवाब देंगे।
मादुरो को कहां ले जाया गया
मादुरो और सिलिया फ्लोरेस को पहले एक अमेरिकी जहाज पर ले जाया गया, फिर न्यूयॉर्क के स्टूअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस पर उतारा। वहां से हेलीकॉप्टर से मैनहट्टन के वेस्टसाइड हेलीपोर्ट पहुंचे। शाम 7 बजे तक पहुंच गए। भारी सिक्योरिटी थी। अब वे मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर, ब्रुकलिन में हैं। सोमवार शाम तक कोर्ट में पेश होने की उम्मीद है।
वेनेजुएला सरकार की प्रतिक्रिया
देश के वाइस प्रेसिडेंट डेल्सी रोड्रिगेज काराकास में दिखीं। उन्होंने ट्रंप के दावों को खारिज किया कि कोई सहयोग हो रहा है। इसके साथ ही मादुरो को ही अपना राष्ट्रपति बताया और “प्रूफ ऑफ लाइफ” मांगा। डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि देश विदेशी सेना के खिलाफ लड़ेगा। सरकार ने लोगों से “इम्पीरियलिस्ट अटैक” के खिलाफ उठने को कहा। स्टेट ऑफ इमरजेंसी घोषित की गई।
दुनिया भर में अमेरिकी तानाशाही की निंदा
संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद की आपातकाल बैठक बुलाई गई। ये सब कोलंबिया, रूस और चीन के आह्वान पर किया गया, जहां यूएन सेक्रेटरी जनरल एंतोनियो गुटेरेस ने इसे UN चार्टर का उल्लंघन बताया। फ्रांस, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, रूस ने भी निंदा की। ब्रिटेन के कीर स्टार्मर ने कहा कि वे इसमें शामिल नहीं हैं, इंटरनेशनल लॉ का पालन होना चाहिए। कनाडा ने वेनेजुएला की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही।















