न्यूयॉर्क के नए मेयर कम्युनिस्ट झुकाव वाले इस्लामवादी जोहरान ममदानी ने एक पत्र के माध्यम से दिल्ली दंगे के षड्यंत्रकारी उमर खालिद के प्रति अपने घड़ियाली आंसू बहाए ही थे कि तुरंत बाद, आठ अमेरिकी सांसदों ने भी भारत के राजदूत को पत्र लिखकर उमर खालिद की फौरन सुनवाई किए जाने की अपील कर दी। इन दोनों घटनाक्रमों में ईकोसिस्टम की बेचैनी देख रहे हैं न? और यदि कहें कि इसके पीछे देश की सबसे बूढ़ी पार्टी के ‘युवराज’ का हाथ है तो हैरानी होगी पर उतनी नहीं, क्यों कि कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण की सोच कोई नई बात नहीं है। नेहरू के जमाने से कांग्रेस इसी के सहारे तो कुर्सी से चिपकी रही थी!
ममदानी और डेमोक्रेट सांसदों के खालिद के पक्ष में यूं अचानक उतरने के पीछे संभावित तानेबाने का केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने भी पुलिंदा खोलकर रख दिया। 2 जनवरी यानी कल भाजपा ने इसे देश विरोधी खतरनाक साजिश कहकर कांग्रेस पर सीधा आरोप जड़ा। भाजपा का दावा है कि अमेरिका की धरती से रची गई इस कथित साजिश में कांग्रेस के ‘युवा युवराज’ राहुल गांधी का हाथ है।
एक पत्रकार वार्ता में भाजपा ने राहुल गांधी और अमेरिकी सांसद जेनिस शाकोव्स्की के बीच 2024 की एक भेंट का हवाला देते हुए इसे कांग्रेस नेता के “भारत विरोधी” कनेक्शन का सबूत बताया। दरअसल शाकोव्स्की ने ही अन्य डेमोक्रेट सांसदों से भारत सरकार से उमर खालिद को जमानत देने की अपील करने वाला पत्र लिखवाया है। उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।

दरअसल यह कोई छुपा तथ्य नहीं है कि राहुल गांधी की भारत विरोधी बयानबाजियां और कार्यक्रम आयोजित करने वालीं शाकोव्स्की और इल्हान उमर के साथ करीबी है। इसे साबित करती एक तस्वीर भी भाजपा ने एक्स X पर साझा की है। इसके साथ ही आरोप लगाया है कि ये अंतरराष्ट्रीय संबंध भारत की छवि को नुकसान पहुंचाते आ रहे हैं।

इसी ट्वीट में तस्वीर के साथ लिखा गया है कि, ‘जब भी विदेश में भारत विरोधी बातें फैलाई जाती हैं, तो पृष्ठभूमि में एक नाम बार-बार आता है, राहुल गांधी। जो लोग भारत को कमजोर करना चाहते हैं, यहां की चुनी हुई सरकार को बदनाम करना चाहते हैं, और उसके आतंकवाद विरोधी कानूनों को कमजोर करना चाहते हैं, राहुल गांधी उनके आसपास ही दिखते हैं।’

भाजपा ने आगे दावा किया कि राहुल की 2024 में अमेरिका में शाकोव्स्की और इल्हान उमर के साथ मुलाकात हुई थी। जनवरी 2025 में शाकोव्स्की द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने वाले अधिनियम’ को पेश किया था, जिसमें ‘स्पष्ट रूप से’ भारत का नाम लिया गया था और कथित ‘मुस्लिम समुदायों पर कार्रवाई’ का जिक्र किया था।
भाजपा ने राहुल गांधी के अमेरिकी ‘आउटरीच’ से जुड़ी घटनाओं को क्रमवार प्रस्तुत किया। यह ‘राहुल गांधी-भारत विरोधी लॉबी के काम करने के तरीके’ को लेकर था। एक टाइमलाइन साफ दिखाती है कि साल 2024 में, जेन शाकोव्स्की अमेरिका में भारत विरोधी सांसद इल्हान उमर के साथ राहुल गांधी से मिली थीं। जनवरी 2025 में, उन्होंने ‘अंतरराष्ट्रीय इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने वाला अधिनियम’ फिर से पेश किया, जिसमें साफ तौर पर भारत का नाम लिया गया और ‘मुस्लिम समुदायों पर कार्रवाई’ का आरोप लगाया गया।’
अब 2026 में वही जेन शाकोव्स्की भारत सरकार को पत्र लिखती हैं और दंगों तथा हिंसा से जुड़े गंभीर मामलों में यूएपीए के तहत आरोपी उमर खालिद के बारे में ‘चिंता’ जताती हैं। शाकोव्स्की के भारत सरकार को 30 दिसम्बर 2025 को लिखे अपने पत्र में खालिद के लिए जमानत और ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार’ मुकदमा चलाने की मांग की है। इसमें खालिद और जेल में बंद उसके साथी आरोपियों के साथ भी निष्पक्ष व्यवहार करने की बात कही गई है।

डेमोक्रेट सांसद जिम मैकगवर्न ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। वे एक्स पर लिखते हैं, ”इस महीने की शुरुआत में मैं उमर खालिद के माता-पिता से मिला, जिन्हें भारत में बिना ट्रायल के पांच साल से ज्यादा समय से जेल में रखा हुआ है।”
मैकगवर्न और अन्य सांसदों के इस पत्र में लिखा है कि ‘मिस्टर खालिद पर आतंकवाद का आरोप लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए सबूतों की विश्वसनीयता संदिग्ध है।’ इसमें स्वतंत्र मानवाधिकार समूहों की ‘जांच’ का हवाला दिया, जिसमें ‘मिस्टर खालिद’ को ‘आतंकवादी गतिविधि से जोड़ने वाले कोई सबूत नहीं मिले।’
अमेरिकी डेमोक्रेट सांसदों के पत्र में भारत से, अंतरराष्ट्रीय नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर समझौते के हस्ताक्षरकर्ता के तौर पर, ‘व्यक्तियों के उचित समय के भीतर ट्रायल पाने या रिहा होने के अधिकारों को बनाए रखने’ की अपील की गई है।
इस पूरे प्रकरण पर भाजपा का कहना है कि विदेशी सांसदों की यह दखल एक ‘भारत विरोधी’ अभियान का हिस्सा है, जो विदेशों में ऐसी कार्रवाइयों और कांग्रेसी ‘युवराज’ नकी मुलाकातों के बीच सीधा संबंध दिखाता है। अभी तक कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों या अंतरराष्ट्रीय सांसदों द्वारा लिखे गए पत्र पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

















