डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के बड़े-बड़े दावों के बीच हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से सामने आया एक वायरल वीडियो हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल इस लाइव वीडियो में एक ड्राइवर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) पर खुलकर यह आरोप लगाता दिख रहा है कि डिजिटल दस्तावेज़ वैध होने के बावजूद उसे और अन्य चालकों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है और ऐसा सिर्फ इसलिए है क्योंकि उसने (ड्राइवर ने) इन परिवहन अधिकारियों की जेब में कुछ (रिश्वत) नहीं डाला और इसी वजह से अन्य लोगों को भी घंटों सड़क किनारे अपनी गाड़ी के पास खड़ा रखकर परेशान किया जा रहा है।
“डिजिटल RC-इंश्योरेंस मान्य नहीं, काग़ज़ दिखाओ” – ड्राइवर का आरोप
ड्राइवर का साफ कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा डिजिलॉकर और mParivahan के तहत RC, इंश्योरेंस, लाइसेंस जैसे डिजिटल डॉक्यूमेंट पूरी तरह वैध हैं, यह सब चेक करने के लिए परिवहन अधिकारियों के पास भी सारा मैकेनिज़्म होने के बावजूद कुल्लू RTO व उनके साथ के अधिकारी फिजिकल काग़ज़ दिखाने का दबाव बनाते हैं।
ड्राइवर का आरोप है, “ये जानबूझकर किया जा रहा है ताकि लोगों को डराया जाए, उलझाया जाए और फिर पैसों की वसूली की जाए।”
यह प्रताड़ित करने का यह तरीका हिमाचल प्रदेश में आम बात है क्योंकि ऐसा करने पर ही इन अधिकारियों की जेबों में रिश्वत का पैसा आता है। ड्राइवर ने तो यहां तक कह दिया कि हिमाचल प्रदेश की सरकार इन अधिकारियों को सैलेरी नहीं दे पा रही जिस वजह से हिमाचल के ये अधिकारी (RTO) सड़कों पर लोगों को परेशान करके पैसा वसूली का धंधा चला रहे हैं।
“अनपढ़ मुलाज़िम, नया वसूली मॉडल ?”
ड्राइवर ने आरोप लगाया कि RTO अधिकारियों ने अपने साथ ऐसे कर्मचारी रखे हैं जिन्हें नियमों का बुनियादी ज्ञान तक नहीं है।
इन कर्मचारियों का कथित काम सिर्फ इतना है—चालकों को रोकना, बहस करना, भ्रम पैदा करना और अंततः मानसिक दबाव बनाकर पैसे ऐंठना है। ड्राइवर के मुताबिक, यह अवैध वसूली का नया मॉडल है जिसे हिमाचल प्रदेश के परिवहन विभाग में खुलेआम अपनाया जा रहा है।
“क्या हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर्यटकों को भगाना चाहती है ?”
ड्राइवर ने एक बेहद गंभीर सवाल उठाया है। उसका कहना है कि जिस तरह से पर्यटकों और बाहरी राज्यों से आए चालकों के साथ बदसलूकी की जा रही है, उससे लगता है कि—“शायद हिमाचल सरकार नहीं चाहती कि टूरिस्ट यहां आएं।” हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर है, लेकिन अगर सड़कों पर RTO का यह व्यवहार जारी रहा, तो इसका सीधा असर राज्य की छवि और आमदनी पर पड़ेगा।
“RTO अपने व्यवहार के लिए बदनाम, फिर भी कार्रवाई शून्य”
ड्राइवर का दावा है कि यह पहला मामला नहीं है। उसके अनुसार, कुल्लू सहित हिमाचल प्रदेश के अन्य कई RTO अपने अहंकारी और अपमानजनक व्यवहार के लिए पहले से ही बदनाम है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि—न कोई विभागीय जांच, न कोई सस्पेंशन, न कोई जवाबदेही। सरकार आंखें मूंदे बैठी है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी उन्होंने हिमाचल के एक ऐसे ही भ्रष्ट RTO का भंडाफोड़ किया था।
“सरकार का खुला संरक्षण?” – RTO की सफाई ने बढ़ाया शक !
वीडियो में RTO अधिकारी जिस अंदाज़ में जवाब देता दिखाई देता है, उसने विवाद को और गहरा कर दिया है। ड्राइवर के अनुसार, अधिकारी के शब्दों और रवैये से यह साफ झलकता है कि—“RTO को सरकार का पूरा आशीर्वाद हासिल है, इसलिए उसे किसी कार्रवाई का डर नहीं।” यह बयान अपने आप में प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता और सत्ता के संरक्षण की ओर इशारा करता है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि RTO का नुमाइंदा बाद में गुस्साए ड्राइवर से सेटिंग करने के लिए उसकी गाड़ी की तरफ आया तो ड्राइवर ने उसकी बात बिना सुने गाड़ी चला ली, वो मुलाजिम आवाज़ देता ही रह गया।
कांग्रेस की हिमाचल सरकार पर आरोपों की लंबी फेहरिस्त
यह मामला अकेला नहीं है। ड्राइवर और सोशल मीडिया यूज़र्स कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पहले से लगे आरोपों की ओर भी इशारा कर रहे हैं—“समोसा कांड”, कई सरकारी योजनाओं में कथित गड़बड़ियां, धारा 118 को कमजोर कर अवैध निर्माणों, खासतौर पर.अवैध मस्जिदों को लाभ पहुंचाने के आरोप के बाद अब सड़कों पर खुलेआम RTO भ्रष्टाचार के आरोप। लोग सवाल कर रहे हैं—क्या यही है कांग्रेस सरकार का “सुशासन मॉडल”?
सड़क से सत्ता तक सवाल
यह वायरल वीडियो सिर्फ एक ड्राइवर की शिकायत नहीं, बल्कि सिस्टम बनाम जनता की तस्वीर बन चुका है। अब सवाल यह नहीं कि वीडियो वायरल हुआ या नहीं, सवाल यह है कि— क्या सरकार निष्पक्ष जांच कराएगी? क्या RTO अधिकारियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? जनता जवाब चाहती है और हिमाचल की सड़कों पर उठे ये सवाल अब सत्ता के दरवाज़े पर दस्तक दे रहे हैं।










