अगर आप 2, 3 और 4 जनवरी को दिल्ली में हैं, तो अपने रोज़ के काम कुछ देर के लिए रोक दें और मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम की ओर निकल जाएं। यहां सजने जा रहा है शब्दों, संस्कृति और संवेदनाओं का भव्य उत्सव -“दिल्ली शब्दोत्सव”। यह कोई साधारण आयोजन नहीं है। यहाँ आकर आपको लगेगा कि काश, हम पहले भी इस यात्रा का हिस्सा बने होते। इस उत्सव की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी और आज यह अपने सबसे भव्य रूप में सामने है। दिल्ली सरकार और सुरुचि प्रकाशन के सहयोग से यह आयोजन अब एक सशक्त सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
शब्दों की दुनिया बड़ी गहरी होती है। अक्षरों से शब्द बनते हैं, शब्दों से विचार और विचार समाज की दिशा तय करते हैं। इन्हीं विचारों की यात्रा को करीब से महसूस करने का अवसर है- दिल्ली शब्दोत्सव।
समय और प्रवेश- महोत्सव सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक चलेगा और पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। आम जनता के लिए पूर्व पंजीकरण की सुविधा दिल्ली शब्दोत्सव की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
उद्घाटन समारोह- महोत्सव का उद्घाटन 2 जनवरी को दोपहर 2 बजे से 3:30 बजे तक होगा। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।
"शब्दोत्सव" में आप सभी आमंत्रित हैं।
2, 3 और 4 जनवरी को दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में होगा भव्य "शब्दोत्सव" का आयोजन। pic.twitter.com/5WA95gj4DL
— Panchjanya (@epanchjanya) December 30, 2025
विशिष्ट अतिथि और वक्ता- इस महोत्सव में देश के कई प्रतिष्ठित नाम शामिल होंगे, जिनमें प्रमुख हैं- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा, सुनील आंबेकर, मनमोहन वैद्य, डॉ. सच्चिदानंद जोशी, पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश भदौरिया, मुकुल कानेटकर, चंद्रप्रकाश द्विवेदी, सांसद सुधांशु त्रिवेदी, माधवी लता,विक्रमजीत बनर्जी और विष्णु शंकर जैन सहित अनेक विशिष्ट वक्ता।
सांस्कृतिक रंग- शाम के समय सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ इस महोत्सव को और भी खास बनाएँगी। हर्षदीप कौर, हंसराज रघुवंशी और प्रह्लाद सिंह टिपनिया अपनी प्रस्तुतियों से समां बाँधेंगे। इसके साथ ही भरतनाट्यम, कथक, भजन संध्या, कवि सम्मेलन और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। दिल्ली सरकार का उद्देश्य है कि दिल्ली शब्दोत्सव को एक स्थायी सांस्कृतिक पहचान के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आने वाले वर्षों में यह मंच भारत की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूती से प्रस्तुत कर सके।

















