मनरेगा में फैले भ्रष्टाचार की जगह भारत सरकार हाल ही में नया कानून लाई है। इस नए कानून का नाम है VB-G RAM G (Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission) अब लागू हो चुका है, और इससे राज्यों को कुल मिलाकर करीब 17,000 करोड़ रुपये का फायदा होने वाला है। ये बात स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिपोर्ट में कही गई है। ये कानून ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी को बढ़ाता है, और MGNREGA की जगह लेगा है।
क्या है ये नया कानून?
VB-G RAM G एक्ट के तहत अब ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का वेतन वाला रोजगार मिलेगा, पहले MGNREGA में ये 100 दिन था। ये रोजगार अनस्किल्ड मैनुअल वर्क करने वाले वयस्क सदस्यों के लिए है। बिल को संसद की विंटर सेशन में पास किया गया था – लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने मंजूरी दी, और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 21 दिसंबर को इस पर हस्ताक्षर कर दिए।
फंडिंग में क्या बदलाव आया?
अब फंडिंग का रेशियो बदल गया है। ज्यादातर राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 हो गया है, यानी केंद्र 60% देगा और राज्य को 40% देना होगा। लेकिन उत्तर-पूर्वी राज्य, केंद्रशासित प्रदेश और हिमालयी राज्य इससे अलग हैं। कुछ लोग कह रहे थे कि ये बदलाव राज्यों पर ज्यादा बोझ डालेगा, उन्हें ज्यादा उधार लेना पड़ेगा या उनकी फाइनेंस कमजोर हो जाएगी।
SBI रिपोर्ट क्या कहती है?
SBI की रिपोर्ट कहती है कि ये डर ज्यादातर गलतफहमी से पैदा हुआ है। उन्होंने एक सिमुलेटेड (काल्पनिक) लेकिन नॉर्मेटिव तरीके से आकलन किया, जिसमें सिर्फ केंद्र के हिस्से को देखा गया। सात पैरामीटर्स पर आधारित ये आकलन इक्विटी (समानता) और एफिशिएंसी (दक्षता) के सिद्धांतों पर टिका है।
इसके मुताबिक, पिछले सात सालों (FY19 से FY25 तक, FY21 को छोड़कर) MGNREGA में मिलने वाले औसत फंड की तुलना में राज्यों को कुल मिलाकर लगभग 17,000 करोड़ रुपये ज्यादा मिलेंगे। यानी ज्यादातर राज्य नेट गेनर रहेंगे, मतलब उन्हें फायदा ही होगा।
कौन-कौन से राज्य ज्यादा फायदा लेंगे?
रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे ज्यादा फायदा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र को होगा। उसके बाद बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात टॉप गेनर्स में शामिल हैं। कुल मिलाकर, सिर्फ दो राज्यों में मामूली नुकसान दिखा है। तमिलनाडु का मामला थोड़ा अलग है – अगर FY24 में मिला एक असामान्य (29% ज्यादा) आवंटन हटा दें, तो उनका नुकसान भी न के बराबर रह जाता है।
क्या है इस रिपोर्ट में विशेष
SBI कहती है कि नए ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया से डेवलप्ड और पिछड़े दोनों तरह के राज्यों को फायदा होगा, क्योंकि इक्विटी और एफिशिएंसी का बैलेंस बना रहेगा। साथ ही, राज्यों के पास मौका है कि वो अपने 40% हिस्से को अच्छे से इस्तेमाल करके फायदे को और बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट ये कहती है कि फंडिंग का नया तरीका राज्यों के लिए ओवरऑल बेहतर साबित होगा, और ज्यादातर राज्य इससे मजबूत होंगे।













