इन दिनों जिस प्रकार से लैंगिक पहचान को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है और जिस प्रकार से महिलाओं को महिला होने की परिभाषा में विस्तार करने के लिए कहा जा रहा है, वह किसी भी दु:स्वप्न से कम नहीं है। इन तमाम गलत बातों का लाभ और कोई नहीं बल्कि यौन अपराधी ही उठा रहे हैं। ताजा मामला यूके का है, जहां पर पुलिस के आंकड़ों ने चौंका दिया है। वुमन’स राइट्स नेटवर्क द्वारा प्राप्त पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में leisure centers में 80 यौन उत्पीड़न, 16 बलात्कार और तांक झांक के 80 मामले सामने आए थे और उनमें से कई मामले मिक्स्ड चेंजिंग रूम्स के थे।
क्या होते हैं मिक्स्ड जेन्डर चेंजिंग रूम्स?
मिक्स्ड जेन्डर चेंजिंग रूम्स अर्थात जेन्डर न्यूट्रल चेंजिंग रूम्स, ऐसे कमरे या स्थान होते हैं, जहां पर महिला, पुरुस, ट्रांसजेन्डर्स आदि सभी लोग कपड़े बदल सकते हैं। इनका समर्थन यह कहते हुए किया जाता है कि इसमें ट्रांसजेन्डर्स, नॉन-बायनरी, और दिव्यांग सभी लोग शामिल होते हैं। और किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होता है।
मगर इनका विरोध करने वाले लोगों का कहना यह है कि इनसे निजता और गोपनीयता के साथ ही सुरक्षा का भी हनन होता है। यूके में ऐसे स्थानों का विरोध करने वाले लोगों का यह भी कहना है कि इन स्थानों की अवधारणा से यूके के इक्वालिटी एक्ट 2010 का उल्लंघन है, क्योंकि ये एक्ट सिंगल सेक्स की निजता और सुरक्षा के लिए प्रावधान प्रदान करते हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट
अब आते हैं उस रिपोर्ट पर जिसे हैरी पॉटर की लेखिका जे के रोलिंग ने एक्स पर पोस्ट किया है। उन्होनें अपनी पोस्ट में लिखा कि “इस महीने की शुरुआत में, वीमेंस राइट्स नेटवर्क, जिसे पुलिस से डेटा मिला था, ने एक रिपोर्ट को प्रकाशित किया, जिसमें बताया गया कि इंग्लैंड और वेल्स में यूनिसेक्स चेंजिंग रूम में महिलाओं और लड़कियों को यौन हमलावर निशाना बना रहे हैं। 2023 में लेज़र सेंटर्स में 80 यौन हमले, 16 बलात्कार और 65 ताँका झांकी की घटनाएं हुईं।“ lbc न्यूज पोर्टल के अनुसार, इसी रिपोर्ट से पहले वीमेंस राइट्स नेटवर्क की शोध ने यह भी पाया था कि हर तीन में से एक काउंसिल यह नियम नहीं मान रही है कि स्विमिंग पूल का इस्तेमाल करने वालों क लिए सिंगल सेक्स चेंजिंग रूम दिया जाए। और ऐसा करने से केवल महिलाओं के लिए स्थानों की कमी हो रही है।
इस पोर्टल के अनुसार “ओलंपिक और कॉमनवेल्थ स्विमिंग चैंपियन शैरन डेविस एमबीई ने इन परिणामों को “चौंकाने वाला” और “भयानक” बताया, और चेतावनी दी कि मिक्स्ड-जेंडर फैसिलिटीज़ “यौन अपराधियों के लिए एक चुंबक और “ऐसी जगहें साबित हो रही हैं, जहाँ महिलाएं खास तौर पर असुरक्षित हैं”।
हालांकि सिंगल सेक्स चेंजिंग रूम्स आवश्यक नहीं है, परंतु जहां पर भी ये हैं, वहाँ पर वे केवल और केवल जैविक महिलाओं के लिए ही हैं। इस नेटवर्क का कहना है कि ऐसे सेंटर्स में मिक्स्ड जेन्डर वाले चेंजिंग रूम्स महिलाओं के लिए घातक साबित हो रहे हैं और साथ ही इनका दुरुपयोग अपराधी प्रवृत्ति के लोग कर रहे हैं।
जे के रोलिंग ने एक और उदाहरण दिया
जे के रोलिंग ने यूके के एक और आधिकारिक आँकड़े का हवाला दिया। उन्होनें वर्ष 2024 की उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें यह बताया गया था कि कैसे यूके की जेलों में 62% ट्रांस के रूप में पहचाने गए कैदियों (ट्रांसवुमन) ने कम से कम एक यौन अपराध किया है। वर्ष 2024 की फ्रीडम ऑफ इनफार्मेशन रीक्वेस्ट के अनुसार 245 ट्रांसजेन्डर कैदी, जिन्होनें अपना कानूनी लिंग पुरुष बताया था, उनमें से 151 लोगों पर यौन अपराध का आरोप था। जबकि सामान्य पुरुष कैदियों में यौन अपराधों के आरोपियों का प्रतिशत 19% ही था।
ट्रांस वुमन में पुरुषों वाली आपराधिक प्रवृति
इन आंकड़ों पर पहले भी ब्रिटेन में महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्थाएं आवाज उठा चुकी हैं। उनका कहना था कि जो ट्रांस वुमन (जैविक पुरुष और मन से महिला) में पुरुषों वाली आपराधिक प्रवृत्ति होती है और इन्हें महिलाओं के साथ एक ही जेल में नहीं रखना चाहिए।
मगर ऐसा हो नहीं रहा है। ट्रांस महिलाओं को जैविक महिला के सामने रखकर एक नए प्रकार का भेद उत्पन्न किया जा रहा है। ऐसा प्रयास किया जा रहा है, जिनमें ट्रांस महिला सामान्य हो जाएं और सामान्य महिलाओं की पहचान को विकृत कर दिया जाए और साधारण महिलाओं को असामान्य प्रमाणित कर दिया जाए।
यह बात ध्यान रखने योग्य है कि ट्रांस महिलाओं जैसा कोई वर्ग यदि है भए तो उसे जैविक महिला के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिये, साधारण एवं सामान्य महिलाओं को महिला होने की परिभाषा से ही परे कर दिया जाए, यह भी नहीं हो सकता है।











