हजारीबाग में लगभग 40 वर्ष तक ‘पाञ्चजन्य’ का वितरण करने वाले श्री केदार सिंह नहीं रहे। 14 दिसंबर को उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार 15 दिसंबर को काशी के मणिकर्णिका घाट पर हुआ। उनकी मौत का कारण एक दुर्घटना बनी। उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त, 2025 को उनके साथ उस समय एक दुर्घटना हुई, जब वे पाञ्चजन्य का वितरण करने जा रहे थे।
दुर्घटना में उनका कुल्हा टूट गया। इसके बाद भी उन्होंने उस युवक को भीड़ की मार से बचा लिया, जिसके कारण वे कई महीने तक बिस्तर पर पड़े रहे। केदार जी संघ के प्रचारक थे। मूल रूप से वे बड़कागांव प्रखंड के उरूप गांव के निवासी थे और इन दिनों हजारीबाग में परिजनों के साथ रहते थे।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राष्ट्र के लिए अपनी अनथक सेवा दी। संघ कार्य करने के साथ ही वे ‘पाञ्चजन्य’ का वितरण करते थे। हजारीबाग शहर, खासकर कचहरी परिसर में वे पाञ्चजन्य बांटते थे। लोग उन्हें स्नेह से ‘पाञ्चजन्य वाले बाबा’ कहकर बुलाते थे। आज भी उनके घर में वर्षों से संजोए ‘पाञ्चजन्य’ के कई अंक विद्यमान हैं।
जे.पी. आंदोलन के लिए उन्हें पेंशन मिलती थी, उसे भी उन्होंने संघ कार्य में ही लगा दिया। हजारीबाग संघ कार्यालय के निर्माण के लिए उन्होंने अपने खाते से लगभग चार लाख रुपए का एकमुश्त सहयोग दिया था। केदार जी का जीवन एक जलते दीपक की तरह था, जो खुद जलकर राष्ट्र, समाज और संगठन का मार्ग रोशन करता रहा। 1928 में जन्मे केदार जी ने अपना पूरा जीवन बिना किसी स्वार्थ के देशसेवा में अर्पित कर दिया था।
पाञ्चजन्य परिवार की ओर से स्व.केदार सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि















