हिमालयन मोनाल, जिसे इम्पेयन मोनाल के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड के हिमालयी जंगलों में 2000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर रहता है। इसे शांत शंकुधारी और रोडोडेंड्रोन और बांस वाले मिले-जुले जंगल पसंद हैं। आमतौर पर ये अकेला रहने वाला पंछी है और कभी-कभी जोड़े में भी रहता है। यह कभी भी झुंड में नहीं रहता। अपनी खूबसूरती और दिलकश आवाज से लोगो का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है।
नर मोनाल को नज़रअंदाज करना नामुमकिन है। चमकीले रंग, मेटैलिक चमक, सिर पर हरी कलगी। मादा बहुत अलग दिखती है। हल्के रंग, ज़्यादा छलावरण। प्रकृति ने उसे जीवित रहने के लिए ऐसा बनाया है। मोनाल अप्रैल से अगस्त तक प्रजनन करता है। नर नाचता है, अपने पंख फैलाता है, ज़ोर से आवाज लगाता है। मादा पहाड़ी पर एक साधारण घोंसला बनाती है और अंडों की रक्षा करती है। पहली नजर में कुछ लोग इसे बिना पर वाला मोर भी समझ बैठते है। यह न केवल उत्तराखंड में बल्कि पूरे भारत में वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत एक प्रोटेक्टेड पक्षी है और इसे लीस्ट कंसर्न की लिस्ट में रखा गया है। लेकिन, जंगल का नुकसान, जंगल की आग और पर्यावरण का खराब होना इसके रहने की जगह के लिए खतरा बना हुआ है।

















