ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार (23 दिसंबर) को 89 साल की उम्र में रायपुर एम्स में निधन हो गया। सांस लेने में तकलीफ होने के कारण उन्हें दो दिसंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे वेंटिलेटर पर ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विनोद शुक्ल के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है।
छत्तीसगढ़ में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल को पिछले माह हिन्दी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साहित्यकार के निधन के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके सम्मान में रायपुर में होने वाले अपने सभी आधिकारिक कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है। एम्स प्रबंधन ने बताया कि विनोद कुमार शुक्ल पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल थे। उन्हें सांस की समस्या के चलते एम्स रायपुर के क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती कराया गया था।
हमेशा स्मरणीय रहेंगे श्री विनोद शुक्ल : पीएम मोदी
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।
राजनांदगांव में हुआ था जन्म
विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में हुआ था। उन्होंने अध्यापन कार्य और साहित्य पर ध्यान केंद्रित किया। शुक्ल ने उपन्यास और कविता विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका पहला कविता-संग्रह ‘लगभग जयहिंद’ 1971 में प्रकाशित हुआ था। उनके प्रमुख उपन्यासों में ‘नौकर की कमीज’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ और ‘खिलेगा तो देखेंगे’ शामिल हैं। कथा-साहित्य में उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ ने 1979 में हिन्दी कहानी और उपन्यास की धारा को एक अलग मोड़ दिया। ‘नौकर की कमीज’ पर फिल्म भी बनी और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
प्रमुख रचनाएं
‘वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह’, ‘सब कुछ होना बचा रहेगा’, ‘अतिरिक्त नहीं’, ‘कविता से लंबी कविता’, ‘आकाश धरती को खटखटाता है’, ‘पचास कविताएं’, ‘कभी के बाद अभी’, ‘कवि ने कहा’, ‘चुनी हुई कविताएं’ और ‘प्रतिनिधि कविताएं’ जैसे संग्रहों ने उन्हें समकालीन हिन्दी कविता के एक अलग तरह के स्वरों में शामिल कर दिया। वह अपनी पीढ़ी के ऐसे अकेले लेखक थे, जिनके लेखन ने नई आलोचना दृष्टि को प्रेरित किया।
इन पुरस्कारों से सम्मानित हुए
उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप, रजा पुरस्कार, शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, हिन्दी गौरव सम्मान, मातृभूमि पुरस्कार, साहित्य अकादमी का महत्तर सदस्य सम्मान और 2023 का पैन-नाबोकोव पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।











