निजी अस्पतालों पर नकेल: केंद्र का नया नियम, अब वेंटिलेटर का खर्च पहले बताना होगा
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निजी अस्पतालों पर नकेल: केंद्र का नया नियम, अब वेंटिलेटर का खर्च पहले बताना होगा

केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस से निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर और ICU के सरप्राइज बिल पर लगाम। अब मरीज के परिवार से लिखित सहमति और पूरा खर्च पहले बताना अनिवार्य। DGHS ने जारी किए नियम, पारदर्शिता और नैतिक उपयोग सुनिश्चित।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Dec 23, 2025, 02:41 pm IST
inभारत, स्वास्थ्य
centre guidlines fofr private hospitals

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने वाले लोग अक्सर ये शिकायत करते हैं कि बिल बहुत ज्यादा आ जाता है, खासकर जब मरीज को वेंटिलेटर या आईसीयू में रखा जाता है। ऐसे में सरप्राइज बिल से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब अस्पतालों को मरीज को वेंटिलेटर पर रखने से पहले परिवार वालों को पूरा खर्च पहले से बताना पड़ेगा। ये नियम डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने अपनी वेबसाइट पर जारी किए हैं। इसका मकसद है कि वेंटिलेटर का इस्तेमाल नैतिक तरीके से हो और पैसे के लिए इसका गलत फायदा न उठाया जाए।

नई गाइडलाइंस में क्या कहा गया है?

ये नए नियम बायोएथिकल सिद्धांतों पर आधारित हैं। मतलब, मरीज की अपनी मर्जी का सम्मान, उसके फायदे के लिए काम करना, अनावश्यक नुकसान से बचाना और सबको बराबर मौका देना। अब डॉक्टरों को वेंटिलेटर शुरू करने से पहले मरीज के परिवार से लिखित सहमति लेनी होगी। सहमति लेते समय साफ-साफ बताना पड़ेगा कि वेंटिलेटर क्यों जरूरी है, इसमें कितना खर्च आएगा, क्या जोखिम हैं, क्या परिणाम हो सकते हैं और प्रक्रिया क्या होगी। परिवार अगर सहमत हो तभी आगे बढ़ेगा इलाज।

साथ ही, अस्पताल को रोजाना का खर्च भी बताना होगा – जैसे वेंटिलेटर सपोर्ट और आईसीयू केयर का दैनिक चार्ज। इससे परिवार पहले से पैसे की तैयारी कर सकेगा। अगर वेंटिलेटर इस्तेमाल नहीं हो रहा तो उसका चार्ज बिल में नहीं जोड़ा जा सकेगा।

पारदर्शिता जरूरी

कई बार प्राइवेट अस्पताल वेंटिलेटर के नाम पर ज्यादा पैसे वसूल लेते हैं या छिपे चार्ज लगाते हैं। इसे रोकने के लिए अब स्टैंडर्ड और पारदर्शी प्राइसिंग स्ट्रक्चर लागू करना होगा। मतलब, अस्पताल में हर विभाग में वेंटिलेटर का चार्ज एक समान होगा। कोई अलग-अलग रेट नहीं चलेगा।

वेंटिलेटर से जुड़े सभी खर्च – जैसे मशीन का चार्ज, आईसीयू चार्ज, फिल्टर, सर्किट वगैरह की कीमतें – सबको सार्वजनिक करना पड़ेगा। ये जानकारी बिलिंग काउंटर पर, आईसीयू के बाहर और अस्पताल की वेबसाइट पर दिखानी होगी। इससे मरीज का परिवार पहले से पता लगा सकेगा कि कुल कितना खर्च आने वाला है।

अगर इलाज के दौरान परिवार को बिलिंग में कोई शिकायत हो तो अस्पताल को तय समय में उसका समाधान करना होगा। एक समयबद्ध शिकायत निवारण सिस्टम बनाना अनिवार्य है।

क्यों जरूरी थे ये नियम?

प्राइवेट अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर का इलाज बहुत महंगा पड़ता है। कई बार अनावश्यक तरीके से वेंटिलेटर पर रखकर बिल बढ़ा दिया जाता है। सरकार का कहना है कि इससे मरीजों का आर्थिक शोषण रुकेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का भरोसा बढ़ेगा। अस्पतालों को वेंटिलेटर के इस्तेमाल का पूरा रिकॉर्ड भी रखना होगा।

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कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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