बांग्लादेश में फरवरी में आम चुनाव होने हैं और उससे ठीक पहले वहां कट्टरपंथियों ने हिंसा शुरू कर दी है। वहां भारत विरोधी तत्व लगातार इस्लाम के नाम पर इस्लामिक कट्टरपंथी हिंसा कर रहे हैं। दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या इसी का नतीजा है। अब इस पर बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीम नसरीन ने कहा कि जिहादी मजदूरों के फैलाए झूठ के कारण हुई उसकी हत्या।
नसरीन ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि दीपू दास को कुछ हिंदू-विरोधी मुस्लिम लोगों ने सीधे उसके फैक्ट्री से बाहर निकालकर मार डाला। दीपू ने कोई गुनाह नहीं किया था। बल्कि, जिहादी मजदूरों द्वारा फैलाई गई अफवाहों की वजह से फ्लोर मैनेजर ने उसे नौकरी से निकाल दिया। और बाहर भूखे गिद्ध जैसे लोग इंतजार कर रहे थे, ये जानते हुए भी मैनेजर ने पुलिस को बिना बताए दरवाजा खोल दिया। फिर उन लोगों ने उसे टुकड़े-टुकड़े कर दिया। अगर पुलिस को बता दिया होता तो क्या होता।
https://Twitter.com/taslimanasreen/status/2002811281116426368?s=20
उत्शब मंडल का जिक्र
बांग्लादेशी लेखिका ने उत्शब मंडल की मॉब लिंचिंग का जिक्र करते हुए सवाल किया कि तुम्हें उत्शब मंडल याद है? उत्शब को पुलिस स्टेशन ले जाया गया था, और बाहर भयानक हैवानों का झुंड इंतजार कर रहा था। आखिरकार पुलिस ने खुद उत्शब को उन हैवानों के हवाले कर दिया। क्या उन्होंने पुलिस के सामने ही उत्शब की आंखें नहीं फोड़ीं? दिन ब दिन देश में जिहादी बढ़ते जा रहे हैं। दिन ब दिन हिंदुओं के खिलाफ नफरत बढ़ती जा रही है। छल, बहकावे और साजिश से वे हिंदुओं को मारना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि हिंदुओं को मारकर जन्नत के दरवाजे खुल जाएंगे।
गौरतलब है कि वहां दीपू की हत्या को लेकर जो खबर बांग्लादेशी मीडिया में खबर फैलाई जा रही है वो ये है कि दीपू ने कथित तौर पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया था। लेकिन, बड़ा सवाल ये है कि कौन हिन्दू एक मुस्लिम बहुल देश में, जहां कट्टरपंथ की आग लगी हो, पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने की हिम्मत करेगा।

















