उत्तर भारत में इन दिनों वायु प्रदूषण काफी बढ़ गया है। दिल्ली समेत कई शहरों में स्मॉग की मोटी चादर छाई हुई है, और लोग सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के नेता और मोहनलालगंज से सांसद आरके चौधरी ने एक ऐसा बयान दे दिया जिससे राजनीतिक हलचल मच गई। उन्होंने कहा कि शवों को जलाने से भी प्रदूषण होता है, और ये बात धर्म से नहीं बल्कि पर्यावरण से जुड़ी है। उनके इस मानसिक दिवालियेपन पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पलटवार किया कि अगर हिन्दू रीति रिवाजों से इतनी ही दिक्कत है तो अपना धर्म बदल लें।
आरके चौधरी ने क्या कहा?
आरके चौधरी ने पर्यावरण प्रदूषण को लेकर बात करते हुए कहा था कि जब शव जलाए जाते हैं तो उससे कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं, साथ ही ऑक्सीजन की खपत भी होती है। उन्होंने होलिका दहन का उदाहरण भी दिया, जहां लकड़ी जलाने से भी यही गैसें बाहर आती हैं। चौधरी का कहना था कि देश प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं है। ये बात धर्म की नहीं, बल्कि पर्यावरण की है। उन्होंने ये भी जोड़ा कि ऐसे काम होने चाहिए जिनसे ऑक्सीजन ज्यादा बने और कार्बन कम निकले, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जाता।
भाजपा नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
चौधरी के इस बयान पर भाजपा ने जोरदार हमला बोला। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि उन्हें नहीं पता आरके चौधरी हिंदू हैं या मुस्लिम, लेकिन अगर उन्हें हिंदू रीति-रिवाजों से इतनी परेशानी है तो वे अपना धर्म बदल लें। गिरिराज ने ये भी कहा कि हिंदू धर्म में शव जलाने से जगह कम लगती है, जबकि दूसरे धर्मों में दफनाने से हर व्यक्ति के लिए जमीन चाहिए।
एक अन्य भाजपा नेता और सांसद मनन कुमार मिश्रा ने चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे वाहनों के धुएं या पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को नहीं देखते, सिर्फ हिंदू धर्म पर हमला करने के लिए ऐसा बयान दे रहे हैं। ये बहुत दुखद है। भाजपा ने इसे हिंदू संस्कारों और परंपराओं पर सीधा हमला बताया।
प्रदूषण की मौजूदा स्थिति
इस विवाद के पीछे उत्तर भारत के कई शहरों में बढ़ता प्रदूषण है। दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 373 तक पहुंच गया है, जो काफी खराब है। लखनऊ में 195, चंडीगढ़ में 266, जयपुर में 198, देहरादून में 243, ग्रेटर नोएडा में 344, गुरुग्राम में 276 और गाजियाबाद में 339 रहा। ठंड बढ़ने और हवा की रफ्तार कम होने से स्मॉग और गहरा हो गया है। मुख्य कारणों में वाहन, फैक्टरियां, पराली जलाना और निर्माण कार्य शामिल हैं, लेकिन चौधरी ने शव दाह और होलिका दहन जैसे मुद्दों को भी जोड़ा।
संत समाज भी भड़का
संत समाज ने भी चौधरी के बयान पर नाराजगी जताई है। मथुरा जैसे जगहों से साधु-संतों ने कहा कि सदियों पुरानी सनातन परंपराओं पर प्रदूषण के नाम से हमला करना गलत है। अगर प्रदूषण की बात है तो उद्योगों और वाहनों पर ध्यान दो। फिलहाल सपा की तरफ से इस बयान पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है।
















