पाकिस्तान के शिकंजे से मुक्त होने को दशकों से छटपटा रहे बलूचिस्तान की ‘निर्वासित सरकार’ के नेता मीर यार बलोच ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। अपने एक्स हैंडल पर उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बलूचिस्तान का सर्वोच्च सम्मान ‘बलूची दस्तार’ प्रदान करने की बात कही है। मीर यार के अनुसार, यह सम्मान 2026 में दिया जाएगा। बलूच नेता का कहना है कि यह भारत-बलूचिस्तान के बीच सदियों पुरानी मित्रता का प्रतीक है। मीर यार बलोच ने उनके आंदोलन को भारत के नैतिक समर्थन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। बलूचों में सदा से भारत के प्रति एक श्रद्धा की भावना रही है। बलूचों का मानना है कि कानूनी रूप से वे पाकिस्तान का अंग नहीं है, लेकिन जिन्ना के देश ने उन्हें गलत तथ्यों के आधार पर अपने से जोड़ा हुआ है। वे वहां से आजाद होना चाहते हैं। इसके लिए बलूच कूटनीतिक तरीकों से मांग उठाते आ रहे हैं। कुछ उग्र स्वभाव के बलूच उग्रपंथी गुट भी जिन्ना की देश की सेना को अनैतिक कार्यों में लिप्त बताकर उनके प्रति हिंसक अभियान छेड़ते आ रहे हैं।

मीर यार बलोच ने अपने एक्स पर एक प्रेस विज्ञप्ति साझा की है, जिसमें कहा गया कि यह बलूच दस्तार सम्मान पीएम मोदी के 15 अगस्त 2016 को लाल किले से दिए भाषण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक प्रतीक है। इस भाषण में उन्होंने बलूचों का धन्यवाद किया था। बलूच नेतृत्व भारत के 1.4 अरब लोगों और मीडिया के समर्थन की सराहना करता है, जो बलूच आवाज को वैश्विक मंच पर पहुंचाते हैं।
हालांकि, बलूच नेता ने यह स्पष्ट किया कि भारत ने अब तक औपचारिक समर्थन नहीं दिया है, लेकिन यह सम्मान नए कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत कर सकता है। गत दिनों ओमान के सुल्तान द्वारा मोदी को दिए गए अपने यहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से इसे जोड़ते हुए, बलूच मानते हैं कि मुस्लिम देश के सुल्तान का वह कदम भारत की मुस्लिम जगत में स्वीकार्यता का संकेत है।

बलूचों पर पाकिस्तानी अत्याचार
बलूचों का मानना है कि जिन्ना के देश ने बलूचिस्तान पर 1948 से ‘कब्जा’ किया हुआ है, जब बलूच नवाब अहमदयार खान ने आजद रहने का ऐलान किया था। लेकिन पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान पर आक्रमण किया और वहां जबरदस्त अत्याचार किए।1958-59 में ‘वन यूनिट’ नीति के तहत बलूच अस्मिता और पहचान को कुचल दिया गया। इससे पहला एक बड़ा विद्रोह हुआ था। फिर 1973-77 के दौरान वहां दूसरा बड़ा विद्रोह हुआ, जिससे गुस्साई जिन्ना के देश की सेना ने 5,000 से अधिक बलूचों को मार डाला था और हजारों को अगवा कर लिया था।
2000 के दशक की बात करें तो नवंबर 2005 में बलूच नेता डॉ. अकबर बुगती की हत्या ने बलूच अलगाववादी आंदोलन को और भड़का दिया था। 2014 में क्वेटा में बलूच लोगों का भयंकर नरसंहार हुआ। 2018-2023 के बीच बलूच नौजवानों को जबरदन अगवा करने को लेकर हजारों मामले दर्ज हुए, जिसमें 2021 में 5,000 से अधिक युवक गायब किए गए थे। इसके लिए पाकिस्तानी पुलिस और सेना को जिम्मदार ठहराया गया था। अप्रैल 2024 में बलूच लिबरेशन आर्मी ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर हमला किया था। अगस्त 2024 में अन्य कई बड़े हमले हुए। नवंबर 2024 में मच में 40 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों की जान ली गई थी। मई 2025 में बलूच नेता मीर यार बलोच ने पाकिस्तान से आजादी की घोषणा की थी।
भारत के प्रति आस्था
बलूचों की भावनाएं भारत के प्रति सकारात्मक हैं, क्योंकि भारत ने वहां किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर आवाज उठाई है। 2016 का मोदी का लाल किले से दिया भाषण बलूचों के लिए एक प्रकार से मलहम था। मीर यार बलोच भारत से बलूचों को अत्याचारों से मुक्ति दिलाने से उम्मीद रखते हैं। ओमान का बलूची समुदाय मोदी को मित्र का दर्जा देता है। बलूचिस्तान मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजता रहा है। बलूच स्वतंत्रता की मांग मजबूत हो रही है।
















