मेहुल चोकसी, जो पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के बड़े घोटाले में मुख्य आरोपी हैं, को भारत लाने की कोशिश में एक बड़ा कदम आगे बढ़ गया है। बेल्जियम की सबसे ऊपरी अदालत, कोर्ट ऑफ कैसेशन ने 17 दिसंबर 2025 को चोकसी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालतों के फैसले को सही ठहराया कि भारत में चोकसी को न्याय से वंचित करने, यातना देने या अमानवीय व्यवहार करने का कोई खतरा नहीं है।
PNB घोटाले की शुरुआत और चोकसी का भागना
ये मामला 2018 का है, जब PNB में करीब 13,000 करोड़ रुपये का फ्रॉड सामने आया। CBI के मुताबिक, चोकसी ने इसमें से लगभग 6,400 करोड़ रुपये निकाले। घोटाला पता चलने से ठीक पहले, जनवरी 2018 के पहले हफ्ते में चोकसी भारत छोड़कर भाग गए। पहले वो एंटीगुआ चले गए, जहां उन्होंने नागरिकता ली, फिर इलाज के बहाने बेल्जियम पहुंचे। 2018 में ही CBI और ED की मांग पर इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया।
बेल्जियम में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया
भारत ने 27 अगस्त 2024 को बेल्जियम को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा, जो मुंबई की स्पेशल कोर्ट के वारंट पर आधारित था। बेल्जियम में चोकसी को हाल ही में गिरफ्तार किया गया। एंटवर्प की निचली अदालत ने 29 नवंबर 2024 को मुंबई कोर्ट के ज्यादातर वारंट को मान्य ठहराया। अपील कोर्ट की इंडिक्टमेंट चैंबर ने भी इसे बरकरार रखा। उन्होंने कहा कि चोकसी जो दस्तावेज पेश कर रहे हैं, वो ये साबित करने के लिए काफी नहीं हैं कि भारत में उन्हें गंभीर खतरा है।
इसे भी पढ़ें: सोनिया गांधी के पास नेहरू के 51 बक्से: सरकार बोली – वापस करें, राष्ट्र जानने का हकदार है
चोकसी के आरोप
चोकसी ने कहा कि भारत में उन्हें निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिलेगा, मीडिया कवरेज से उनकी छवि खराब हुई है, और एंटीगुआ से किडनैपिंग की कोशिश हुई थी। उन्होंने इंटरपोल की एक कमिटी (CCF) का हवाला दिया, जिसने 2022 में उनका रेड नोटिस हटा दिया था। चोकसी का आरोप था कि शुरुआती सुनवाई में ये जानकारी छिपाई गई। लेकिन कैसेशन कोर्ट ने कहा कि अपील में सब कुछ देखा गया, और बचाव का पूरा मौका मिला। कोर्ट ने माना कि निचली अदालतों ने कानून ठीक से लागू किया, और यातना रोकने वाला प्रावधान यहां लागू नहीं होता। भारत ने बेल्जियम को चोकसी की सुरक्षा, जेल व्यवस्था, मेडिकल सुविधा और ट्रायल के बारे में कई आश्वासन दिए हैं।
कोर्ट ऑफ कैसेशन का अंतिम फैसला
बेल्जियम की इस टॉप कोर्ट ने सिर्फ कानूनी गलतियां चेक कीं, फैक्ट्स दोबारा नहीं देखे। उन्होंने निचली अदालतों में कोई खामी नहीं पाई। चोकसी पर 104 यूरो का खर्चा भी लगाया गया। जजों की बेंच में फिलिप वैन वोल्सेम समेत पांच जज थे। ये फैसला प्रत्यर्पण की राह को और साफ करता है, हालांकि अभी गिरफ्तारी और अन्य प्रक्रियाएं चल रही हैं।

















