नई दिल्लीः सिंगापुर के पूर्व उपप्रधानमंत्री तेओ ची हीअन का कहना है कि भारत और सिंगापुर का जुड़ाव सदियों पुराना है। सिंगापुर के नाम में भी भारत की प्राचीन संस्कृति की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। सिंगापुर या सिंगापुरा नाम संस्कृत से निकला है। यह दक्षिण-पूर्व एशिया पर भारत के शुरुआती सांस्कृतिक प्रभाव का प्रमाण है। 1867 तक सिंगापुर का प्रशासन कलकत्ता से ही संचालित होता था। उन्होंने यह बात नई दिल्ली में आयोजित 5वें अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति व्याख्यान में कही।
भारत-सिंगापुर के रिश्तों की मजबूत नींव
तेओ वर्तमान में टेमासेक के चेयरमैन हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक जुड़ाव दोनों देशों की साझेदारी को दिशा देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सिंगापुर यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाया गया। उन्होंने कहा कि लोगों, संस्कृति और व्यापार के सदियों पुराने आदान-प्रदान ने भारत-सिंगापुर रिश्तों को और मजबूत बनाया है।
उन्होंने आधुनिक सिंगापुर के विकास में भारतीय समुदाय के महत्वपूर्ण योगदान का भी जिक्र किया। तेओ ने कहा कि भारतीय प्रवासी सिंगापुर की सामाजिक विविधता, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के निर्माण में एक प्रमुख स्तंभ रहे हैं।

मोदी सरकार द्वारा लागू आर्थिक सुधारों की प्रशंसा की
तेओ ची हीअन ने भारत के वैश्विक संदेश ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संदेश आज की विभाजित दुनिया में बेहद प्रासंगिक है। मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए आर्थिक सुधारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन कदमों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। तेओ ने जीएसटी को भारत के लिए बड़ा सुधार बताया, जिसने देश को एकीकृत राष्ट्रीय बाजार में बदल दिया है। उन्होंने श्रम कानूनों के चार कोड में एकीकरण को दुनिया को चकित कर देने वाला कदम बताया।
व्याख्यान से पहले तेओ ची हीअन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। जयशंकर ने बताया कि चर्चा के दौरान भारत में हाल के आर्थिक सुधारों से पैदा हुए नए निवेश अवसरों पर विस्तार से बातचीत हुई। तेओ ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की। उन्होंने बताया कि टेमासेक का भारत में कुल निवेश 50 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने की योजना है।











