बांग्लादेश इस समय बेहद अशांत दौर से गुजर रहा है। नोबेल पुरस्कार विजेता और माइक्रोक्रेडिट मॉडल को दुनिया में लोकप्रिय बनाने वाले मोहम्मद यूनुस आज देश की अंतरिम सरकार के मुखिया हैं। लेकिन हाल के दिनों में देश में हिंसा, अव्यवस्था और राजनीतिक तनाव बढ़ने से लोग सवाल पूछने लगे हैं कि आखिर जमीन पर हालात इतने बिगड़े क्यों हैं। इसी माहौल में बांग्लादेश के पूर्व खुफिया अधिकारी और राजनयिक अमीनुल हक पोलाश ने पहली बार खुलकर यूनुस के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं।
यूनुस नेटवर्क की अंदरूनी परतें- पोलाश के मुताबिक, उन्होंने लगभग दस साल तक राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश सेवा में काम किया। उनका कहना है कि सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन जैसे ही उनकी जांच यूनुस के आर्थिक नेटवर्क तक पहुँची, उन्हें धमकियाँ मिलने लगीं। उनकी डिप्लोमैटिक पोस्ट अचानक वापस बुला ली गई, जिससे उन्हें लगा कि देश लौटना खतरनाक होगा। इसी डर से वे देश छोड़कर बाहर रहने को मजबूर हुए। पोलाश कहते हैं कि माइक्रोक्रेडिट की असली अवधारणा यूनुस की नहीं थी, बल्कि यह एक विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट था, जिसका समर्थन Ford Foundation कर रही थी। इस परियोजना को तीन युवा शोधकर्ताओं- स्वपन अदनान, नसीरुद्दीन और एच.आई. लतीफी ने मिलकर तैयार किया था। समय के साथ इन सभी के नाम मिटा दिए गए और पूरा श्रेय यूनुस को मिल गया। उनके अनुसार, बाहर की दुनिया यूनुस को गरीबों का मसीहा मानती है, लेकिन बांग्लादेश के अंदर उनका नेटवर्क बहुत बड़ा और प्रभावी है। ग्रामीण बैंक से शुरू होकर करीब 50 संस्थाओं का एक ऐसा तंत्र बना, जिसका अंतिम नियंत्रण यूनुस पर ही रहा। ग्रामीण टेलिकॉम जैसी कंपनियों ने अरबों टका कमाए, लेकिन मजदूरों को उनका उचित हिस्सा नहीं मिला। कई संस्थाएं नुकसान दिखाती रहीं, जबकि पैसा एक ही नेटवर्क में घूमता रहा।
पोलाश के आरोपों से घिरते यूनुस- पोलाश का दावा है कि यूनुस ने कई सौ करोड़ टका अपनी ही स्थापित ट्रस्टों में लोन के रूप में स्थानांतरित किए ताकि टैक्स से बचा जा सके। इस पर नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने 15.4 करोड़ टका टैक्स लगाया, जिसे अदालतों ने भी सही ठहराया। उनकी संस्थाओं पर करीब 2,000 करोड़ टका बकाया है, जो वर्षों से कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा हुआ है। पोलाश यह भी कहते हैं कि यूनुस की राजनीतिक महत्वाकांक्षा अचानक नहीं पैदा हुई। लगभग 20 साल पहले ही उनके निजी खाते में करोड़ों टका आए थे, उसी समय जब वे एक राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे थे। उन्हें लगता है कि यह सब लंबे समय की रणनीति का हिस्सा था।
अंतरिम सरकार के बाद यूनुस पर लगे मामलों का गायब होना- सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि 2024 में अंतरिम सरकार बनने के बाद यूनुस के खिलाफ चल रहे कई मामलों का अचानक गायब हो जाना क्या किसी गहरी राजनीतिक पकड़ का संकेत है? कई बड़े टैक्स और लेबर केस बंद हो गए, यहां तक कि उनके करीबी लोगों को सरकार में अहम पद भी मिल गए। अंत में पोलाश का कहना है कि अगर यूनुस सच में पारदर्शी हैं तो उन्हें अपनी सभी संस्थाओं और खातों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फोरेंसिक ऑडिट करवाना चाहिए, ताकि दुनिया असली सच जान सके।














