मीडिया के एक वर्ग में यह खबर सुर्खियों में छाई है कि पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी और ब्रिटिश उच्चायुक्त जेन मैरियट के बीच हुई चर्चा हुई है जिसमें अपराधियों के लेन—देन की बात की गई है। पाकिस्तान ने कहा है कि उसके यहां छुपे कथित तौर पर नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करने वाले रोचडेल ग्रूमिंग गैंग से जुड़े रहे कारी अब्दुल रऊफ और आदिल खान को वह सौंप देगा बशर्ते ब्रिटेन पाकिस्तान को दो ‘राजनीतिक विरोधी’ उनके हवाले कर दे। यहे दोनों हैं शहजाद अकबर और आदिल राजा। ये कई साल से ब्रिटेन में रह रहे हैं। बताया जाता है, ये इमरान खान के समर्थक हैं इसलिए पाकिस्तान की वर्तमान सरकार पर लगातार सवाल उठाते रहते हैं।
पाकिस्तान के मंत्री और ब्रिटेन की उच्चयुक्त के बीच यह चर्चा 5 दिसंबर को हुई। इस बातचीत में पाकिस्तान द्वारा दो अलग-अलग मुद्दों पर ब्रिटेन से सहयोग मांगा गया है। पता चला है कि कथित रूप से 47 नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करने वाले ग्रूमिंग गैंग के कारी अब्दुल रऊफ और आदिल खान ब्रिटेन से भागकर जिन्ना के देश में आ बसे हैं। यहां बता दें कि रोचडेल ग्रूमिंग गैंग ब्रिटेन का एक कुख्यात गिरोह है जो बच्चों और नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण में शामिल रहा है। यह गिरोह ब्रिटेन के कई हिस्सों में नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा के लिए एक चुनौती बना हुआ है। ये गैंग सैकड़ों नाबालिग लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर चुका है। पाकिस्तान का कहना है कि वह उन दोनों को ब्रिटेन को सौंप देगा बस, ब्रिटेन उनके दो ‘राजनीतिक अपराधी’ उन्हें सौंप दे।
पाकिस्तान की मौजूदा सरकार ने इन दो लोगों के ब्रिटेन में शरण लेने पर चिंता जाहिर व्यक्त की है। शहजाद अकबर और आदिल राजा वर्षों से ब्रिटेन में रह रहे हैं और पाकिस्तान की शाहबाज सरकार विरोधी बयानबाजी करते रहे हैं। ये इमरान खान समर्थक माने जाते हैं। इमरान खान के प्रति उनकी निष्ठा और आलोचनात्मक दृष्टिकोण पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के खिलाफ सवाल खड़े करने में साफ तौर पर दिखता है। इन राजनीतिक विरोधियों को वापस लेने की मांग पाकिस्तान ने इसलिए उठाई है क्योंकि सरकार के अनुसार ये दो लोग पाकिस्तान के आंतरिक ‘राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा के लिए खतरा’ हैं। आरोप है कि ये लोग पाकिस्तानी राजनीति में हस्तक्षेप कर रहे हैं और विरोधी सरकार की आलोचना करते हुए देश में अशांति पैदा कर रहे हैं। पाकिस्तान यह मांग करता है कि शहजाद अकबर और आदिल राजा उनको वापस किए जाएं जिससे कि उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई हो।
यह नई बात नहीं है कि ब्रिटिश प्रशासन कड़े कानूनी ढांचे का पालन करता है, कोई भी व्यक्ति जो ब्रिटेन में कानूनी रूप से शरण प्राप्त करता है, उसके प्रत्यर्पण में कई बार जांच और न्यायिक प्रक्रिया जरूरी होती है। राजनीतिक शरण लेने वालों के मामले में ब्रिटेन आमतौर पर मानवाधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका और गंभीर सत्यापन प्रक्रिया का पालन करता है जिससे प्रत्यर्पण पर रोक लग सकती है। खासतौर पर यदि यह माना जाता हो कि प्रत्यर्पण के बाद व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार हो सकता है।
पाकिस्तान की यह शर्त दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों पर दबाव डाल रही है। साफ है कि राजनीतिक शरण लेने वाले व्यक्तियों को लेकर ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच विश्वास का अभाव है। पाकिस्तान की मौजूदा सरकार की आलोचनाओं को ब्रिटेन में बसे उसके विरोधी तत्वों को संरक्षण से दोनों देशों के रिश्ते दबाव में हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बातचीत से दोनों देशों के बीच इन विवादित मुद्दों पर किस हद तक समझौता होगा या समाधान निकल पाएगा। पाकिस्तान चाहता है कि उसके नागरिकों के प्रति न्याय हो और राजनीतिक स्थिरता कायम रहे, जबकि ब्रिटेन अपने कानून, स्वतंत्र न्यायपालिका और शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा में सावधानी बरताना चाहता है।
















