नई दिल्ली/शिमला: हिमाचल प्रदेश में भूकंप का खतरा बढ़ गया है। यह सूबा उच्चतम भूकंपीय श्रेणी जोन-6 में शामिल किया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने भूकंप खतरे का नेशनल मैप जारी करते हुए प्रदेश को जोन-6 में शामिल किया है। इससे पहले के मानचित्र में सूबे को दो हिस्सों में बांटा गया था। नए मानचित्र ने यह पूरा विभाजन समाप्त करते हुए पूरे राज्य को समान रूप से सर्वाधिक जोखिम वाली श्रेणी में शामिल कर दिया है। इसमें जोन-5 और ज़ोन-4 का पुराना भेद अब वैज्ञानिक और कानूनी रूप से अप्रासंगिक हो गया है।
इनमें कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, मंडी, कुल्लू और किन्नौर के कुछ हिस्सों को जोन-5 यानी सर्वाधिक जोखिम क्षेत्र में रखा गया था। शिमला, सोलन, सिरमौर, बिलासपुर, ऊना और लाहौल-स्पीति सहित किन्नौर के कुछ हिस्सों को जोन-4 में रखा गया था। इसे उच्च जोखिम वाला लेकिन जोन-5 से कम संवेदनशील माना जाता था। 
बीआईएस के नए मानचित्र को 2025 भूकंप डिजाइन कोड के तहत संभाव्य भूकंपीय जोखिम आकलन जैसी उन्नत वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर तैयार किया गया है और यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ढांचे के लिए एक आधिकारिक आधार दस्तावेज की तरह काम करेगा। यह बदलाव हिमाचल में सरकारी योजनाओं, भवन डिजाइन, पुल और सड़कों की संरचनात्मक सुरक्षा, सार्वजनिक अवसंरचना ऑडिट, भू-स्खलन और चट्टान धंसने जैसे जोखिमों के संयोजन पर आधारित नियोजन को मजबूती देगा और भविष्य के विकास कार्यों में सुरक्षा मानकों को अधिक कठोर बनाना आवश्यक होगा।
भूकंप के लिहाज से पहले से ही संवेदनशील है हिमाचल…
हिमाचल भूकंप के इतिहास के लिहाज से पहले से ही अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है और हिमालयी भू-पट्टी भू-वैज्ञानिक रूप से सक्रिय मानी जाती है। कई वर्षों से हिमाचल में लगातार कम तीव्रता वाले भूकंप महसूस किए जा रहे हैं। इनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3 के आसपास रहती है और चंबा जिला सबसे ज्यादा बार झटकों का केंद्र रहा है।











