भारत सरकार ने साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए एक नया नियम लागू करने का फैसला किया है। इस नियम के अनुसार अब व्हाट्सऐप, टेलीग्राम जैसे सभी मैसेजिंग ऐप्स में सिम बाइंडिंग अनिवार्य कर दी गई है। दूरसंचार विभाग ने 28 नवंबर को एक नोटिस जारी किया और बताया कि आने वाले 90 दिनों के भीतर यह नियम पूरे देश में लागू हो जाएगा।
सिम बाइंडिंग क्या होती है- सिम बाइंडिंग का मतलब है कि जिस सिम कार्ड के नंबर से आपका मैसेजिंग ऐप रजिस्टर्ड होगा, वही ऐप उसी फोन में चलेगा जिसमें वह सिम लगी होगी। अगर आप उस सिम को निकालकर किसी और फोन में ऐप लॉग इन करना चाहेंगे, तो वह खुल नहीं पाएगा। साथ ही, यदि आपने ऐप लॉग इन करने के बाद फोन से सिम निकाल दी, तो कुछ समय बाद ऐप अपने आप बंद हो जाएगा और आपको फिर से लॉग इन करना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इस नियम की वजह से मैसेजिंग ऐप्स और सिम कार्ड आपस में जुड़े रहेंगे। ऐप हर 6 घंटे में खुद-ब-खुद जांच करेगा कि सिम अभी भी फोन में है या नहीं। यदि सिम नहीं मिलेगी तो ऐप बंद होकर लॉग आउट हो जाएगा।
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यह नियम क्यों लागू किया गया- आज के समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। भारत में लाखों लोग प्रतिदिन ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में साइबर अपराध के कारण देश को लगभग 22,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अक्सर अपराधी दूसरे देशों में बैठे होते हैं। वे फर्जी सिम कार्ड या बिना पहचान के इंटरनेट का इस्तेमाल करके भारतीयों को धोखा देते हैं। खासकर मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से वे लोगों का भरोसा जीतकर बैंकिंग फ्रॉड, लिंक भेजकर ठगी, OTP धोखाधड़ी जैसे अपराध करते हैं। सरकार का मानना है कि सिम बाइंडिंग से ऐसे अपराध काफी हद तक कम हो जाएंगे क्योंकि बिना सिम के कोई भी आपकी प्रोफाइल का दुरुपयोग नहीं कर पाएगा। दूसरे देश के अपराधी भारतीय नंबर का उपयोग करके फ्रॉड करना कठिन होगा। किसी भी ऐप से जुड़ा मोबाइल नंबर और डिवाइस साफ़ तौर पर ट्रैक हो सकेगा। फर्जी सिम या नकली पहचान वाले खाते नहीं चल पाएंगे।











