रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बोले-सरकारी धन से बाबरी मस्जिद बनवाना चाहते थे नेहरू, पटेल ने सफल नहीं होने दी योजना
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बोले-सरकारी धन से बाबरी मस्जिद बनवाना चाहते थे नेहरू, पटेल ने सफल नहीं होने दी योजना

राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोगों ने पटेल की विरासत को छिपाने और मिटाने की कोशिश की, लेकिन जब तक भाजपा सत्ता में है, वे इसमें कामयाब नहीं होंगे।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Dec 3, 2025, 10:39 am IST
in भारत

नई दिल्ली: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सार्वजनिक धन से बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाना चाहते थे लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने उनकी योजना सफल नहीं होने दी। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू के इस प्रस्ताव का विरोध किया था और सार्वजनिक धन से बाबरी मस्जिद का निर्माण नहीं होने दिया।

तुष्टीकरण में विश्वास नहीं करते थे पटेल
राजनाथ सिंह ने कहा कि जब नेहरू ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का मुद्दा उठाया तो पटेल ने स्पष्ट किया कि मंदिर एक अलग मामला है, क्योंकि इसके जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक 30 लाख रुपये आम लोगों द्वारा दान किए गए थे। सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘एकता मार्च’ के तहत वडोदरा के निकट साधली गांव में एक सभा को संबोधित करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि पटेल सच्चे उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष थे जो कभी तुष्टीकरण में विश्वास नहीं करते थे।

न सोमनाथ और  राम मंदिर पर खर्च हुआ सरकारी पैसा…
राजनाथ सिंह ने कहा कि एक ट्रस्ट का गठन किया गया था और सोमनाथ मंदिर कार्य पर सरकार का एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया। इसी तरह, सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक भी रुपया नहीं दिया। पूरा खर्च देश की जनता ने वहन किया। इसे ही असली धर्मनिरपेक्षता कहते हैं। उन्होंने कहा कि पटेल प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने पूरे करियर में कभी किसी पद की लालसा नहीं की। नेहरू के साथ वैचारिक मतभेदों के बावजूद, पटेल ने उनके साथ काम किया क्योंकि उन्होंने महात्मा गांधी को एक वचन दिया था।

पटेल ने गांधी की सलाह पर वापस लिया नामांकन तब नेहरू बने कांग्रेस अध्यक्ष
राजनाथ सिंह ने दावा किया कि 1946 में नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष इसलिए बने क्योंकि पटेल ने गांधी की सलाह पर अपना नामांकन वापस ले लिया था। कांग्रेस कमेटी के अधिकांश सदस्यों ने वल्लभभाई पटेल के नाम का प्रस्ताव रखा। जब गांधीजी ने पटेल से अनुरोध किया कि वे नेहरू को अध्यक्ष बनने दें और अपना नामांकन वापस ले लें, तो पटेल ने तुरंत अपना नाम वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने पटेल की विरासत को छिपाने और मिटाने की कोशिश की, लेकिन जब तक भाजपा सत्ता में है, वे इसमें कामयाब नहीं होंगे।

 

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Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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