भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार राज्य में गौ-माता की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी और इस दिशा में ठोस व सख्त कदम उठाएगी। राज्य में अवैध बूचड़खाने और गौवंश की तस्करी को पूरी तरह बंद करने की तैयारी चल रही है। इसी उद्देश्य से सरकार स्वतंत्र गौ-सुरक्षा कानून लाने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है।
विधि, लोक निर्माण एवं आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने संकेत दिया कि आगामी विधानसभा सत्र से पहले इस प्रस्ताव की स्पष्ट रूपरेखा सामने आ सकती है। गौ-सुरक्षा की मांग को लेकर अनशन पर बैठे गौसेवकों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद मंत्री हरिचंदन ने यह जानकारी दी । विधि मंत्री हरिचंदन के आश्वासन के बाद अनशन पर बैठे गौसेवकों ने पांच दिनों से चल रहे अनशन को समाप्त किया ।
सरकार राज्य में गौ- सुरक्षा के लिए सर्वोत्तम कानून बनाने के लिए प्रतिबद्ध
श्री हरिचंदन ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक के मन में गौ-माता के प्रति गहरी आस्था है और राज्य सरकार किसी भी परिस्थिति में इस भावनात्मक आस्था को आहत होने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री मोहन मजिही के नेतृत्व में ‘डबल इंजन सरकार’ ओडिशा में गौ-सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और गौ-सुरक्षा प्रतिनिधियों के साथ एक और बैठक होगी, जिसमें नए कानून की रूपरेखा और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि सरकार राज्य में गौ-सुरक्षा के लिए सर्वोत्तम कानून बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

गौ-तस्करी-अवैध गौवंश की तस्करी के विरोध में था अनशन
मंत्री के आश्वासन के बाद पांच दिनों से जारी आमरण अनशन को वापस ले लिया गया। चर्चा में सरकारी मुख्य सचेतक सरोज कुमार प्रधान, एकाम्र भुवनेश्वर विधायक बाबू सिंह, धर्मशाला विधायक हिमांशु शेखर साहू, भद्रक विधायक सीतांशु शेखर महापात्र, महाकालपाड़ा विधायक दुर्गा प्रसन्न नायक सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि राज्य में बढ़ती गौ-तस्करी और अवैध गौवंश की तस्करी के विरोध में विभिन्न गौ-रक्षा संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता पिछले पांच दिनों से भुवनेश्वर में अनशन पर बैठे थे। उनका कहना था कि राज्य में यद्यपि गौवंश की तस्करी रोकने और गौ-हत्या पर प्रतिबंध से जुड़े कई कानून पहले से मौजूद हैं, लेकिन पुलिस व प्रशासन के ढीले रवैये के कारण इन कानूनों का पालन प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश की ओर लगातार बड़े पैमाने पर गौ-तस्करी जारी है।
जब तक सख्त कानून नहीं बनेगा तब तक गौ-तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाना मुश्किल
अनशन पर बैठे गौ-सेवकों की तबीयत भी बिगड़ने लगी थी, लेकिन उन्होंने मांगें पूरी हुए बिना अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया था। इससे पहले भी गौ-तस्करी पर रोक लगाने के लिए ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने सरकार और प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राज्य के अनेक जिलों में गौ-तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे थे, जिससे गौ-सेवक संगठनों में नाराज़गी बढ़ रही थी। गौ-रक्षा संगठनों का कहना है कि जब तक एक कठोर, स्वतंत्र और कड़ाई से लागू होने वाला कानून नहीं बनेगा, तब तक गौ-तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाना मुश्किल है। इसी मांग को बल देने के लिए उन्होंने आमरण अनशन का मार्ग अपनाया था। अब सरकार के नए आश्वासन के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से समाप्त किया गया है। कटक के राऊसपटणा चौक पर गोमांस मिलने से तनाव, पुलिस की हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य गौ-रक्षा आंदोलन के बीच कटक शहर में राऊसपटणा चौक के निकट गोवंश के अवशेष मिलने पर क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। चौक के पास सड़क किनारे एक कचरे के ढेर के समीप गोवंश के सिर की हड्डी और अन्य अंग मिलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण होती चली गई।
सूचना मिलते ही कटक डीसीपी ऋषिकेश खलारी, अतिरिक्त डीसीपी अमरेन्द्र पांडा तथा पुरीघाट थाना पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने भीड़ को शांत करवाते हुए आश्वासन दिया कि घटना की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। पुलिस के हस्तक्षेप और समझाइश के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई।
पुलिस के मुताबिक, राऊसपटणा स्थित एक पूजा मंडप से कुछ दूरी पर मौजूद अड़िया-गदा के पास देर रात करीब 11 बजे गोवंश के अवशेष देखे गए थे। घटना की जानकारी आसपास फैलते ही स्थानीय लोगों में रोष बढ़ गया। उन्होंने तत्काल अड़िया-गदा को हटाने की मांग की, यह कहते हुए कि यहां लंबे समय से कचरे के ढेर के कारण ऐसी घटनाएँ बार-बार देखने को मिल रही हैं। लोगों ने यह भी मांग की कि क्षेत्र से सभी मांस दुकानों को हटाया जाए और ऐसे कृत्य करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

डीसीपी ने आश्वासन दिया कि कचरा ढेर हटाने सहित सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और निरंतर निगरानी रखी गई। उधर केंदूझर जिले के तेलकोई थाना क्षेत्र से पुलिस ने एक कांस्टेबल को गो-तस्करों के साथ मिलीभगत के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि कांस्टेबल गौरहरि पात्र गो-तस्करों को पुलिस की गतिविधियों, छापेमारी और जांच से जुड़ी गोपनीय सूचनाएँ समय-समय पर उपलब्ध करा रहा था। उसके सहयोग से तस्कर कई बार पुलिस को चकमा देकर फरार होने में सफल हुए। खुफिया विभाग की निगरानी और मोबाइल फोन ट्रैकिंग के बाद पात्र की संलिप्तता की पुष्टि हुई। इसके बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया। इस घटना ने पुलिस और अवैध गो-तस्करों के बीच कथित सांठगांठ पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ऐसी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।











