क्रिसिल ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम पहली छमाही में अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन, यानी 8 प्रतिशत की वृद्धि, के बाद उठाया गया है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 8.2 प्रतिशत रही, जो पहले के अनुमान से अधिक है। हालांकि, मुद्रास्फीति में कमी के कारण चालू कीमतों पर जीडीपी वृद्धि 8.7 प्रतिशत ही रही। जोशी के अनुसार पहली छमाही में 8 प्रतिशत वृद्धि हुई थी और दूसरी छमाही में अमेरिकी शुल्क बढ़ने के प्रभाव से वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि पिछली छह तिमाहियों में सबसे अधिक रही। यह संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों और घरेलू आर्थिक दबावों के बावजूद मजबूती दिखाई है। तुलना के लिए, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर केवल 5.6 प्रतिशत थी, जबकि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही।
निजी खपत और सेवा क्षेत्र में तेजी से अर्थव्यवस्था को बल- क्रिसिल के अनुसार इस उच्च वृद्धि की सबसे बड़ी वजह निजी खपत रही है। घरेलू मांग में मजबूती और उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। आपूर्ति पक्ष की दृष्टि से भी हाल के महीनों में विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों की वृद्धि में उल्लेखनीय तेजी आई है। जोशी ने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति में कमी से देश में वैकल्पिक खर्च बढ़ा है, जिससे लोगों ने विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च करने की क्षमता हासिल की। इसका फायदा तीसरी तिमाही में भी देखने की उम्मीद है। सरकारी निवेश स्थिर रहने का अनुमान है, जबकि निजी निवेश में धीमी शुरुआत के बाद तेजी आने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था में और सुधार हो सकता है। क्रिसिल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सेवा क्षेत्र का योगदान अब पहले की तुलना में और मजबूत हुआ है। विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और व्यापार सेवाओं में निर्यात बढ़ने से अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त बल मिला है।
मजबूत घरेलू मांग और निर्यात से GDP में वृद्धि जारी- विशेषज्ञों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर में सुधार का मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं के निर्यात में मजबूती और मुद्रास्फीति में कमी है। खाद्य कीमतों में नरमी ने लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाई और उपभोक्ताओं को अधिक खर्च करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके अलावा, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं, जो उपभोक्ताओं की आय और खर्च क्षमता को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, इस साल की उच्च वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत क्षमता और स्थिरता को दर्शाती है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापार शुल्क और अन्य अनिश्चितताओं का प्रभाव भी सीमित नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद, घरेलू मांग और निजी खपत की स्थिरता अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद आधार बनती दिख रही है। भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में मजबूत रफ्तार से बढ़ रही है। पहली छमाही और जुलाई-सितंबर तिमाही की उच्च वृद्धि दर ने वित्त वर्ष के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अनुकूल आर्थिक कारकों के चलते तीसरी तिमाही में भी वृद्धि जारी रहेगी। सरकारी निवेश स्थिर रहेगा, जबकि निजी निवेश में तेजी आने की संभावना है। यदि यह रुझान बना रहता है, तो भारत का आर्थिक परिदृश्य आगामी महीनों में और मजबूत होने की संभावना रखता है।

















