माओवाद-नक्सलवाद ऐसे होगा जड़ से खत्म: ओडिशा सरकार की नई नीति तोड़ेगी 'लाल सलाम' की कमर, जानिए कैसे
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होम भारत ओडिशा

माओवाद-नक्सलवाद ऐसे होगा जड़ से खत्म: ओडिशा सरकार की नई नीति तोड़ेगी ‘लाल सलाम’ की कमर, जानिए कैसे

अधिकारियों ने कहा कि इस नीति का मूल उद्देश्य सक्रिय माओवादियों को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करना है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Nov 28, 2025, 03:28 pm IST
in ओडिशा

भुवनेश्वर: राज्य में माओवाद को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने माओवादी समर्पण एवं पुनर्वास नीति को व्यापक रूप से संशोधित करते हुए इसे और अधिक प्रभावी बनाया है। नई नीति के तहत वित्तीय सहायता में बड़ी बढ़ोतरी की गई है ।

आत्मसमर्पण किए गए हथियारों पर मिलने वाले पुरस्कारों को कई गुना बढ़ाया गया है और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से पुनर्वास लाभों का दायरा विस्तृत किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि इस नीति का मूल उद्देश्य सक्रिय माओवादियों को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करना है।

नई नीति से उग्रवाद और माओवाद खत्म करने के प्रयासों को मजबूती
एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पहल को देश की सर्वश्रेष्ठ नीतियों में से एक बताया और कहा कि इससे उग्रवाद खत्म करने के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नई नीति का लक्ष्य न केवल कट्टर माओवादी कैडरों को संगठन से दूर करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति दोबारा माओवाद की ओर न लौटें।

इसके लिए उन्हें रोजगार अवसर, उद्यमिता सहायता, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सहयोग प्रदान किए जाएंगे। दो श्रेणियों में विभाजन संशोधित नीति अनुसार समर्पण करने वाले माओवादी दो श्रेणियों—ए और बी —में वर्गीकृत किए जाएंगे। श्रेणी ए में केंद्रीय समिति सचिव, पोलित ब्यूरो सदस्य, केंद्रीय मिलिटरी कमिशन सदस्य, राज्य समिति सदस्य, विशेष जोनल समिति सदस्य और क्षेत्रीय समिति सदस्य जैसे शीर्ष स्तर के माओवादी शामिल होंगे। श्रेणी बी में डिविजनल समिति सचिव, मिलिटरी प्लाटून कमांडर, डिविजनल समिति सदस्य, क्षेत्र समिति सचिव और क्षेत्र समिति सदस्य जैसे निचले रैंक के कैडर होंगे। वित्तीय सहायता में दोगुनी वृद्धि नई नीति के तहत उच्च श्रेणी A कैडरों को दी जाने वाली सहायता राशि को ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया गया है।

5 लाख इनाम वाले माओवादी को आत्मसमर्पण पर 10 लाख का पुरस्कार
श्रेणी B कैडरों को ₹2.5 लाख सहायता प्रदान की जाएगी। हथियार जमा करने पर मिलने वाले पुरस्कारों में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। अब कार्यशील हल्की मशीनगन जमा करने पर ₹4.95 लाख, AK-47 राइफल पर ₹3.3 लाख (जो पहले मात्र ₹10,000 था), SLR/INSAS राइफल पर ₹1.65 लाख, और .303 राइफल पर ₹82,500 मिलेंगे। उच्च इनाम वाले सक्रिय माओवादियों के लिए विशेष लाभ जिन सक्रिय माओवादियों पर ₹5 लाख या उससे अधिक का इनाम घोषित है, उन्हें आत्मसमर्पण पर अतिरिक्त ₹10 लाख का प्रोत्साहन मिलेगा।

यह राशि आत्मसमर्पण करने वाले कैडर के नाम पर जिले के एसपी द्वारा बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में तीन वर्षों के लिए जमा की जाएगी। इस अवधि के दौरान ब्याज की राशि उन्हें दी जाएगी, जबकि मूल राशि तीन साल बाद उनके आचरण और पुनर्वास समिति की अनुशंसा के आधार पर रिलीज की जाएगी। कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से व्यापक पुनर्वास सरकार आत्मसमर्पण करने वालों को आवास के लिए अंत्योदय गृह योजना, स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए हेल्थ कार्ड, और खाद्य सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन भी उपलब्ध कराएगी।

केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्यों पर अब 1.10 करोड़ का इनाम
वांछित माओवादियों के लिए नया इनाम ढांचा वांछित माओवादियों के लिए सरकार ने इनाम की राशि में बड़े पैमाने पर संशोधन किया है। नई संरचना के तहत केंद्रीय समिति, पोलित ब्यूरो और केन्द्रीय मिलिटरी कमिशन के सदस्यों पर अब ₹1.10 करोड़ का इनाम घोषित किया गया है, जो इस श्रेणी के शीर्ष नेतृत्व को लक्षित करता है। इसके बाद राज्य समिति और विशेष जोनल समिति के सदस्यों के लिए ₹55 लाख का प्रावधान किया गया है। क्षेत्रीय समिति सदस्यों पर इनाम राशि बढ़ाकर ₹33 लाख कर दी गई है। डिविजनल स्तर पर, डिविजनल समिति सचिवों पर ₹27.5 लाख का इनाम तय किया गया है, जबकि डिविजनल समिति सदस्यों पर ₹22 लाख का इनाम घोषित किया गया है। यह संशोधित इनाम ढांचा राज्य में उग्रवाद की रीढ़ माने जाने वाले प्रमुख माओवादी कैडरों को चिह्नित कर उन्हें सरेंडर के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इसके अलावा, आत्मसमर्पण करने वाले विवाहित दंपतियों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में मान्यता दी जाएगी, जिससे दोनों को पूर्ण पुनर्वास लाभ स्वतंत्र रूप से मिल सकेंगे। कानूनी पहलुओं पर भी ध्यान नीति के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर दर्ज जघन्य अपराधों के मुकदमे अदालत में जारी रहेंगे। हालांकि सरकार अपराध की प्रकृति, पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के आधार पर विशिष्ट मामलों में अभियोजन वापस लेने पर विचार कर सकती है। छोटे मामलों में सरकार की अनुमति से ‘प्ली बार्गेनिंग’ की व्यवस्था भी लागू हो सकती है। साथ ही जरूरत पड़ने पर आत्मसमर्पित वामपंथी उग्रवादियों को मुफ्त कानूनी सहायता भी प्रदान की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि संशोधित नीति ओडिशा की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें उग्रवाद से निपटने के लिए केवल बल प्रयोग नहीं, बल्कि पुनर्वास, सशक्तिकरण और पूर्ण सामाजिक पुनर्सम्मिलन पर ध्यान दिया गया है। यह दीर्घकालिक शांति और स्थायी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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