नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार मरे हुए लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करवाने के आरोपों में बुरी तरह से घिर चुकी है। BJP ने सूबे में इसे मुद्दा बनाया है और चुनाव आयोग से भी इसकी शिकायत की है। BJP का आरोप है कि ममता बनर्जी SIR प्रक्रिया को सही से नहीं होने दे रही है और BLO को डराकर उनपर अनावश्यक दबाव बना रही है। BJP ने मरे हुए लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने के आरोप भी लगाए हैं। ऐसे में सवाल भी उठ रहा है कि आखिर क्यों TMC सरकार सूबे में बीएलओ को डरा-धमका रही है और SIR की प्रक्रिया सही से नहीं होने दे रही है। आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला?
88 लाख से ज्यादा मरे लोग वोटर लिस्ट में कैसे हुए शामिल?
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने साफ कहा कि बंगाल में 88 लाख से ज्यादा वोटर ऐसे हैं जो मर चुके हैं, लेकिन आज भी वोटर लिस्ट में हैं। इन्हें हटाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सूबे में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान व्यापक अनियमितताएं सामने आ रही हैं। इसकी जानकारी उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग को दी है। BJP का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को चुनाव आयोग से मिला और पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हो रही कथित धांधली, इस प्रक्रिया के राजनीतिक दुरुपयोग और दबाव की शिकायत दर्ज कराई।
उन्होंने आरोप लगाया कि सूबे की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर अनावश्यक दबाव डाल रही हैं। SIR के दौरान ममता सरकार BLO को डरा-धमका रही है। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार हर BLO को इस काम के लिए 18,000 रुपये दिए जाने चाहिए, लेकिन ममता सरकार उन्हें पैसे नहीं दे रही है। BLO की की मदद के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटर तक नियुक्त नहीं किए जा रहे हैं।
BJP का दावा- राज्य छोड़ चुके लोगों को भी वोटर लिस्ट में किया जा रहा है एड
BJP का दावा है कि पश्चिम बंगाल में मृत व्यक्तियों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़े जा रहे हैं। सूबे में 88 लाख से ज्यादा मृत लोगों के नाम सूची में शामिल होने का दावा किया गया है। BJP का आरोप है कि राज्य छोड़ चुके/पलायन कर चुके लोगों के नाम भी वोटर लिस्ट में जोड़े जा रहे हैं। ममता बनर्जी अधिकारियों पर दबाव डाल रही है। घुसपैठिये गलत रिश्तेदारी दिखाकर दस्तावेज तैयार करा रहे हैं और ससुर को पिता बताने तक के मामले सामने आए हैं। इसे लेकर पश्चिम बंगाल BJP के नेताओं ने चुनाव आयोग से कहा कि स्वतंत्र पर्यवेक्षक भेजे जाएं। मतुआ समाज और अन्य हिंदू, बौद्ध, जैन, ईसाई जो बांग्लादेश से आए हैं, चुनाव आयोग उन्हें आश्वस्त करे कि SIR के दौरान उनके नाम सुरक्षित रूप से जोड़े जाएं और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।











