कनाडा से चिंता वाली खबर प्रकाश में आई है, जहां ओटावा शहर में खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू की अगुवाई वाले सिख फॉर जस्टिस ने एक अनौपचारिक जनमत संग्रह आयोजित किया। इस दौरान खालिस्तानियों ने भारतीय तिरंगे का अपमान किया। ये खालिस्तानी अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा दे रहे हैं, जो भारत की एकता के खिलाफ है। घटना 23 नवंबर 2025 को हुई जब हजारों की संख्या में खालिस्तान समर्थक मैकनैब कम्युनिटी सेंटर पहुंचे। यहीं पर भारतीय राजनेताओं को गालियां और उन्हें मार डालो, घेरो काटो जैसे नारे लगाए गए।
जनमत संग्रह का मकसद
कथित जनमत संग्रह करवाने वाले एसएफजे को भारत सरकार ने यूएपीए के तहत आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। इसका मकसद था पंजाब को भारत से अलग करके खालिस्तान देश बनाने पर लोगों की राय लेना। आयोजकों का दावा है कि 53,000 से ज्यादा लोगों ने वोट डाला। इसमें नवजोत शिशुओं से लेकर 80-90 साल के बुजुर्ग तक शामिल थे। कनाडा के अलग-अलग प्रांतों जैसे ओन्टारियो, अल्बर्टा, ब्रिटिश कोलंबिया और क्यूबेक से लोग आए। मतदान का समय खत्म होने के बाद भी लाइनें लगी रहीं, और कुछ लोग घंटों इंतजार करते रहे। एसएफजे के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू ने सैटेलाइट के जरिए वीडियो संदेश दिया। उसने जहर उगला कि ये कदम खालिस्तान की आजादी के लिए जरूरी है।
हिंसक नारे और तिरंगे का अपमान
कार्यक्रम के दौरान खालिस्तान समर्थकों ने भारत के राजनेताओं और अधिकारियों के खिलाफ खुलेआम नफरत भरे नारे लगाए। ‘मार डालो’, ‘घेरो-काटो’ जैसे नारे लगाए गए। सबसे शर्मनाक पल आया जब मतदान खत्म हुआ। खालिस्तानियों ने भारतीय ध्वज को फाड़ डाला। तिरंगे को जमीन पर पटककर उसके टुकड़े किए गए। ये दृश्य वीडियो में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। स्थानीय पुलिस के लायजन अधिकारी वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
ये पहली बार नहीं जब कनाडा में ऐसी घटनाएं हुईं। एसएफजे पिछले सालों से ऐसी गतिविधियां चला रहा है। मार्च 2024 में कैलगरी में तलवारों और भालों से तिरंगे को काटा गया था। अप्रैल 2025 में सरे शहर में झंडे को सड़क पर घसीटा। नवंबर 2025 की शुरुआत में मॉन्ट्रियल में 500 से ज्यादा कारों की रैली निकली, जहां ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे। 15 नवंबर को ओटावा में भारतीय उच्चायोग के बाहर कार रैली हुई। इस बार के आयोजन में संतोख सिंह खेला भी दिखा, जो 1985 के एयर इंडिया बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया था।
भारत-कनाडा के बीच तनाव का नया मोड़
ये घटना उसी दिन घटी जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी दक्षिण अफ्रीका में जी20 सम्मेलन के दौरान भारत के पीएम नरेंद्र मोदी से मिले। दरअसल, एसएफजे इस बात से तकलीफ है कि कार्नी ने मोदी से हाथ मिलाया। भारत सरकार ने हमेशा कहा है कि ऐसे जनमत संग्रह देश की संप्रभुता पर हमला हैं। दिल्ली ने कनाडा से कई बार कहा कि वहां सक्रिय उग्रवादी तत्वों पर सख्ती करें।

















