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17 जनजातीय परिवारों ने की घर वापसी, ईसाई पादरियों के झांसे में आकर हुए थे कन्वर्ट

विश्व हिन्दू परिषद के सहयोग से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कन्वर्ट हुए इन परिवारों ने जनजातीय परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की और इसके बाद वे अपने स्वधर्म में लौट गये।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Nov 24, 2025, 07:06 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: जनजातीय बहुल मालकानगिरी जिले के माथिली प्रखंड के कुमरापल्ली पंचायत के सोडीगुड़ा गांव के 17 परिवारों के सदस्यों ने घर वापसी की है। ये सारे लोग मिशनरियों के झांसे में आकर कन्वर्ट हुए थे। कुमरापल्ली पंचायत और आस-पास के पंचायतों के लोग तथा समाज के प्रमुख लोगों की उपस्थिति में जनजातीय परिवारों ने घर वापसी की।

पूजा-अर्चना कर स्वर्धम में लौटे कन्वर्ट परिवार….
विश्व हिन्दू परिषद के सहयोग से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कन्वर्ट हुए इन परिवारों ने जनजातीय परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की और इसके बाद वे अपने स्वधर्म में लौट गये। इस दौरान इन परिवारों ने आपसी मतभेद भूलकर एकजुट होकर रहने की शपथ ली। घर वापसी करने वाले परिवारों के सदस्यों ने बताया कि वे कुछ साल पहले ईसाई पास्टरों के झांसे में आकर अपनी मूल संस्कृति को छोड़ चुके थे। ईसाई पास्टरों ने उन्हें बहला-फुसलाकर स्वास्थ्य संबंधी गलत दावे कर कन्वर्ट किया था।

ईसाई पादरियों ने बीमारी ठीक होने और गरीबी दूर होने का दिया था झांसा
परिवार में कुछ लोग अस्वस्थ होने पर ईसाई पादरियों ने उन्हें समझाया था कि यदि वे अपने मूल धर्म को छोड़कर ईसाइयत अपना लेते हैं तो उनकी बीमारी ठीक हो जाएगी। इतना ही नहीं, ईसाई पास्टरों ने उन्हें यह भी विश्वास दिलाया था कि कन्वर्ट होने के बाद वे गरीब नहीं रहेंगे और उनके पास पैसा आ जाएगा। इसी झांसे में आकर वे ईसाइयत में कन्वर्ट हो गये थे। उन्होंने आगे बताया कि, जबकि वे कन्वर्ट हो गये, वे अपने समाज से कट गये थे। वे अपनी परंपराओं, संस्कृति और त्योहारों को मनाने में असमर्थ थे, जिससे उनके मन में मलाल था। इसके परिणामस्वरूप गांव में कई बार तनाव देखने को मिलता था, जिससे गांव का शांत वातावरण प्रभावित हो रहा था।

घर वापसी के बाद बोले लोग- खुशी है हम अपने पूर्वजों की संस्कृति में लौट रहे हैं
इसके बाद, प्रमुख लोग हमें लगातार अपने मूल धर्म में वापस लौटने के लिए समझा रहे थे। इसके लिए लगातार बैठकें आयोजित की जाती रहीं। इन बैठकों में हमें यह समझाया गया कि कन्वर्ट होने से न तो बीमारी ठीक होती है और न ही आर्थिक स्थिति सुधरती है। यह केवल आप लोगों को अपने पूर्वजों से काटने की साजिश है। पहले हम इस बात को समझ नहीं पा रहे थे, इसलिए हम घर वापसी के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। लेकिन जब यह बात हमें बार-बार बताई गई और समझाया गया, तो हमें वास्तविकता समझ में आ गई। इसे समझने के बाद, कुल 17 परिवारों ने पुनः अपने मूल धर्म में लौटने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि इसी क्रम में हम घर वापसी कर रहे हैं। आज हमें प्रसन्नता है कि हम अपने पूर्वजों की संस्कृति में लौट रहे हैं।

बहला-फुसलाकर मासूम लोगों को कन्वर्ट करते हैं ईसाई पादरी
बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि आदिवासी समाज की पारंपरिक रीति-रिवाजों और पर्व-त्योहारों को छोड़कर अन्य धर्म अपनाने से क्षेत्र का वातावरण प्रभावित हो रहा था। ग्रामीण लंबे समय से उन परिवारों को अपने मूल धर्म में लौटने के लिए समझा रहे थे, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हो रहे थे। लेकिन आखिर में ये सारे लोग अपने स्वधर्म में लौट आए। इस कार्यक्रम में कुमरापल्ली के सरपंच सहित कई आदिवासी नेता उपस्थित थे। घर वापसी कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद के माथिली प्रखंड के अध्यक्ष गुप्त दुरुआ और अन्य कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

बजरंग दल के ओडिशा (पश्चिम) प्रांत के संयोजक रामचंद्र नायक ने बताया कि ईसाई मिशनरियां जनजातीय समाज के भोले-भाले लोगों को बहला-फुसलाकर कन्वर्ट करने का प्रयास करती हैं। इससे समाज में वैमनस्य और कटुता पैदा हो जाती है, जिससे भाई-भाई और परिवारों के बीच शत्रुता का भाव उत्पन्न होता है। इसलिए कन्वर्जन को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने की आवश्यकता है। राज्य में बल-छल और प्रलोभन के जरिए गैर कानूनी तरीके से कन्वर्जन को रोकने के लिए कठोर कानून हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इस कानून को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि समाज में विद्वेष और कटुता न आए।

Topics: Missionary influence on tribal communitiesOdisha tribal faith conversion and reversionOdisha tribal families return to their rootsOdisha 17 tribal families reconversionTribal families revert from conversion in OdishaMissionary conversion OdishaOdisha tribal families return after conversionRe-conversion of tribal families OdishaOdisha tribal return to original faithTribal families homecoming Odisha
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