पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) करवा रहा है। इसके चलते वहां रहने वाले हजारों की संख्या में अवैध घुसपैठियों में भगदड़ सी मच गई है। हालात ये हो गए हैं कि बंगाल में बसे अवैध बांग्लादेशी लगातार वापस लौट रहे हैं। आकंड़ों की मानें तो पिछले दो हफ्तों में करीब 26,000 घुसपैठिए गायब हो चुके हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कहा जा रहा है कि ये वो लोग हैं, जो कि चोरी छिपे बांग्लादेश से अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल में घुस आए थे। लेकिन अब डर के मारे भाग रहे हैं। SIR एक तरह की जांच प्रक्रिया है, जो नागरिकता साबित करने के लिए चलाई जाती है, लेकिन सिर्फ इसकी चर्चा से ही ये भगदड़-सी मच गई है।
SIR की अफवाहों ने क्यों फैलाई घबराहट?
ये सब कुछ नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) और दूसरे सिटिजनशिप चेक के बाद की बात है। इन अवैध घुसपैठियों को खौफ सता रहा है कि अगर SIR शुरू हुई, तो बिना कागजात वाले या नकली दस्तावेज वालों को डिटेंशन कैंपों में डाल दिया जाएगा। ज्यादातर बांग्लादेशी प्रवासी ऐसे ही हैं—उनके पास वैध पेपर नहीं होते। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर मैसेज घूम रहे हैं कि ‘सभी अवैध प्रवासियों को पकड़ लिया जाएगा’। लोकल ब्रोकर्स भी चेतावनी दे रहे हैं कि जांच दोबारा होगी और लिस्ट में नाम आने का खतरा है। एक मजदूर ने बताया, “हमारे पास तो कुछ भी नहीं है, नकली कागज भी पुराने हो चुके। अगर SIR आई, तो जेल ही समझो। इसलिए घर लौट रहे हैं।” सरकारी तरफ से कोई डिपोर्टेशन ऑर्डर या बड़ी ऐक्शन नहीं हुआ, फिर भी ये लोग खुद ही बॉर्डर क्रॉस कर रहे हैं।
बॉर्डर पर क्या हो रहा है
बंगाल-बांग्लादेश बॉर्डर पर हलचल बढ़ गई है। मालदा के हकीमपुर बॉर्डर पोस्ट पर घुसपैठियों की भीड़ जमा हो गई है,जो कि पकड़े जाने के डर से भाग रहे हैं। एसआईआर सबसे ज्यादा असर मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के बॉर्डर एरिया में दिख रहा है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के अफसरों के अनुसार, सिर्फ मालदा सेक्टर से ही 8,000 से 9,000 लोग दो हफ्तों में पार हो चुके। लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने कन्फर्म किया कि पूरे वेस्ट बंगाल से 26,000 के आसपास लोग लापता हैं, जो ज्यादातर बांग्लादेश पहुंच चुके। एक BSF अधिकारी ने कहा, “ये कोई जबरदस्ती नहीं, लोग खुद आकर कहते हैं कि डर के मारे जा रहे हैं।” चपाइनवाबगंज एरिया के हकीमपुर पोस्ट पर तो रात-दिन लोग आ रहे हैं।
स्कूल से बाजार तक
एसआईआर शुरू होने के बाद एक बड़ा परिवर्तन ये देखने को मिला है कि बांग्लादेशी बॉर्डर के पास के स्कूलों में बच्चों की अटेंडेंस अचानक गिर गई है। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना के सरकारी स्कूलों में 20-30 फीसदी बच्चे गायब हो गए हैं। इससे पता चलता है कि टीएमसी सरकार में कितनी बड़ी संख्या में अवैध तरीके से बांग्लादेशी न केवल बंगाल में घुस गए थे। बल्कि वे यहां की व्यवस्था में शामिल होने में भी कारगर रहे थे। लोकल दुकानदार बताते हैं कि रेगुलर कस्टमर जो रोज आते थे, वो एकदम नजर नहीं आ रहे। पास के शहरों और कस्बों में मजदूरी का काम भी कम हो गया—निर्माण साइट्स पर दिहाड़ी वाले कम नजर आते हैं।

















