21 नवंबर को भारतीय मजदूर संघ (BMS) के एक हाई-लेवल डेलीगेशन ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया से मुलाकात की। इस दौरान BMS ने लेबर कोड्स को लागू करने और इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) को तुरंत बुलाने की मांग करते हुए एक मेमोरेंडम सौंपा। डेलीगेशन का नेतृत्व BMS के जनरल सेक्रेटरी श्री रवींद्र हिमटे ने किया। BMS ने कोड ऑन वेजेज और कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी को मजदूरों के हित में बताते हुए इनका समर्थन किया। संघ का कहना है कि ये दोनों कोड ऐतिहासिक और क्रांतिकारी हैं, और सभी वर्कर्स को लाभ देंगे।
हालाँकि, BMS ने इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड और OSH & WC कोड में मौजूद कुछ मजदूर-विरोधी नियमों का कड़ा विरोध भी दर्ज कराया। मंत्री ने BMS की सभी चिंताओं को ध्यान से सुना और सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए भरोसा दिया कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्य- श्री सीके साजी नारायणन, पूर्व राष्ट्रपति श्री एस. मल्लेशम (उपाध्यक्ष), श्री बी. सुरेन्द्रन (आयोजन सचिव), श्री गिरीश आर्य, श्री रामनाथ गणेश (सचिव) और श्री पवन कुमार (उत्तरी क्षेत्र आयोजन सचिव)।
BMS ने श्रम मंत्री से इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस बुलाने की भी अपील की, जो 2016 से लंबित है। यह मांग सभी प्रमुख ट्रेड यूनियनों की तरफ़ से लगातार उठाई जा रही है।
BMS की मुख्य मांगें-
- ईपीएफ (EPF) की सीमा 15,000 से बढ़ाकर 30,000 रुपये की जाए।
- ईएसआई (ESI) सीमा 21,000 से बढ़ाकर 42,000 रुपये की जाए।
- बोनस की गणना को 7,000 से बढ़ाकर 14,000 रुपये किया जाए।
- न्यूनतम पेंशन 1,000 से बढ़ाकर 7,500 रुपये की जाए, और इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक एवं आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाए।
- डेलीगेशन ने आंगनवाड़ी वर्कर्स, हेल्पर्स, आशा वर्कर्स, मिड-डे मील वर्कर्स और अन्य स्कीम-बेस्ड वर्कर्स के मानदेय में बढ़ोतरी की भी मांग की।
इसके साथ ही, BMS ने कहा कि सरकार को बीड़ी, प्लांटेशन, कंस्ट्रक्शन, हैंडलूम, खेती और मछली पालन जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स पर विशेष ध्यान देना चाहिए। केंद्र सरकार और CPSEs में लंबे समय से काम कर रहे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को भी नियमित करने की मांग की गई। BMS ने यह भी कहा कि GST लागू होने के बाद बीड़ी जैसे सेक्टर्स के वेलफेयर बोर्ड से सेस-बेस्ड फंडिंग खत्म हो गई है, इसलिए मजदूरों के सही मुआवज़े के लिए सरकार को बजट सपोर्ट देना चाहिए।
















