शुक्रवार सुबह पश्चिम बंगाल में भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को घबरा दिया। प्रदेश के कई जिलों में जमीन हिलती हुई महसूस की गई, जिसके बाद लोग घरों से बाहर निकल आए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, भूकंप का केंद्र बांग्लादेश के टुंगी से लगभग 27 किलोमीटर पूर्व दर्ज किया गया। स्थानीय समय के अनुसार यह झटके सुबह 10:38:30 बजे महसूस हुए। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) ने बताया कि मुख्य झटके के बाद भी कई क्षेत्रों से हल्के कंपन की रिपोर्टें मिली हैं।
क्यों आते हैं भूकंप- हमारी पृथ्वी चार मुख्य परतों से बनी है- इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट। पृथ्वी की सबसे बाहरी परत जिसे क्रस्ट कहा जाता है, कई बड़ी-बड़ी प्लेटों में बंटी होती है। इन प्लेटों को टेक्टॉनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये प्लेट्स लगातार बहुत धीमी गति से हिलती-डुलती रहती हैं। जब ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं, आपस में रगड़ खाती हैं या अपनी जगह से खिसक जाती हैं, तो पृथ्वी के नीचे ऊर्जा पैदा होती है। यही ऊर्जा रिलीज होकर जमीन में कंपन पैदा करती है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं। कभी-कभी झटके बहुत हल्के होते हैं और कई बार इतने तेज कि इमारतें भी हिलने लगती हैं। अगर भूकंप की तीव्रता ज्यादा हो तो कंपन कई किलोमीटर दूर तक महसूस किए जाते हैं।
भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है- भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए रिक्टर स्केल का उपयोग होता है। इसमें भूकंप की तीव्रता को 1 से 9 या उससे अधिक तक दर्ज किया जाता है। भूकंप के दौरान जो ऊर्जा तरंगे जमीन के नीचे से निकलती हैं, उन्हें मशीनों के माध्यम से रिकॉर्ड किया जाता है, और उसी के आधार पर पता चलता है कि भूकंप कितने तीव्रता का था और उसका केंद्र कहाँ था।
भूकंप के दौरान क्या सावधानियां रखें- भूकंप के झटके महसूस होते ही घबराएं नहीं। घबराहट इस समय सबसे बड़ी गलती होती है। अपने आसपास के लोगों को शांत रहने के लिए कहें और तुरंत सुरक्षित जगह की ओर बढ़ें।इमारतों, बिजली के खंभों, दीवारों और पेड़ों से दूर रहें। खुली जगह पर चले जाएं। तुरंत किसी मजबूत टेबल, डेस्क या बिस्तर के नीचे छिप जाएं। अपने सिर और गर्दन को हाथों से ढककर सुरक्षित रखें। कांच के दरवाजों, खिड़कियों और शीशों से दूर रहें, क्योंकि इनके टूटने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। भूकंप के दौरान या तुरंत बाद लिफ्ट में जाना खतरनाक हो सकता है। अगर आप पहले से ही सुरक्षित जगह पर हैं, तो बाहर भागें नहीं। शांत रहें और झटके पूरी तरह रुकने का इंतजार करें।

















