पश्चिम बंगाल विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री का भाषण चर्चा का केंद्र बन गया। अपने पहले जवाबी संबोधन में उन्होंने राज्य की संस्कृति, सुरक्षा और विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सरकार की सोच और योजनाओं को सामने रखा। भाषण के दौरान सदन में कई बार हंगामा भी हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री अपने फैसलों और नीतियों को लेकर पूरी तरह दृढ़ नजर आए। खास बात यह रही कि उन्होंने सड़कों के नाम बदलने, अवैध घुसपैठ पर कार्रवाई और चर्चित आरजी कर मामले में न्याय दिलाने को लेकर बड़े ऐलान किए।
सड़कों के नाम बदलने की तैयारी में सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में उन सड़कों और सार्वजनिक स्थलों के नामों की समीक्षा की जाएगी, जो मुगल, पठान या ब्रिटिश शासकों के नाम पर रखे गए हैं। इसके लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी। उनका कहना था कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान और गौरव को बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और महान भारतीय व्यक्तित्वों को उचित सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि कोलकाता की सुरहावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस दिशा में आगे भी काम जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि देशभक्तों और समाज के लिए योगदान देने वाले लोगों के नाम पर सड़कों का नाम रखा जाना चाहिए।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दावा किया कि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगी। मुख्यमंत्री ने बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट को लेकर पूर्व सरकार पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए और मामले की जांच कराने की बात कही। वहीं, आरजी कर मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। उनके इस बयान से सदन का माहौल भावुक हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

















