जरा कल्पना करें कि विश्व स्तर की सौन्दर्य प्रतियोगिता में देश की लड़की प्रतिनिधित्व करने जाए और उसे उसके ही मुल्क वाले इस बात का ताना दें कि उसकी रंगत गोरी नहीं है, तो इस मानसिकता को क्या कहेंगे? क्या उन लोगों के लिए लड़की का रंग महत्वपूर्ण है या फिर उनका मनोबल बढ़ाना? उस लड़की को कैसा लगेगा, जो उस मुल्क का प्रतिनिधित्व करने के लिए गई है? यह बात सुनने में अजीब लग सकती है, मगर ऐसा हो रहा है और वह भी पाकिस्तान में। मिस यूनिवर्स पाकिस्तान रोमा रियाज, मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में पाकिस्तान की ओर से प्रतिभाग कर रही हैं।
हर प्रतिभागी की तरह रोमा ने भी सोचा होगा कि उनके देश के लोग उनका साथ देंगे मगर उनके साथ उल्टा ही हो रहा है। उन्हें तानों का सामना करना पड़ रहा है। उनके सांवले रंग पर उन्हें नकारात्मक टिप्पणियां मिल रही हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि “मेरी त्वचा का रंग पाकिस्तान की मिट्टी के रंग जैसा ही है, और उन महिलाओं के रंग जैसा है, जिन्होंने हमारे परिवार और हमारे घर बनाए हैं।“
रोमा रियाज ने क्या कहा
उन्होंने लिखा, “एक गहरी रंगत की महिला होने के नाते जब मैं पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व एक वैश्विक मंच पर कर रही हूं, तो मुझे पता ही था कि इसकी नकारात्मक प्रतिक्रिया होगी। परिवर्तन कभी भी विरोध के बिना नहीं आते हैं। मगर मैं इसे पूरी गरिमा के साथ यह जानते हुए ले रही हूं कि हर आने वाला कदम अगली लड़की के लिए नए दरवाजे खोलेगा। दक्षिण एशिया की हर उस इस लड़की के लिए मेरा यह कदम है, जो खुद को इस मंच पर देखना चाहती है।“
रोमा रियाज ने यह भी लिखा, “सभी भारतीयों, लैटिन एवं मेक्सिकन का मैं आभार व्यक्त करती हूं, जिन्होंने मेरा समर्थन किया और आपके कारण मुझे इस बात पर विश्वास हुआ कि सौन्दर्य, दयालुता और एकता सीमाओं से परे की बात है!”
ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखने वालीं रोमा के समर्थन में भी लोग आए हैं। ऐसे ही एक कंटेन्ट क्रीऐटर बिलाह हसन ने पाकिस्तान के गोरे रंग के प्रति आकर्षण पर वीडियो पोस्ट किया है।
पाकिस्तान में कई अभिनेत्रियों ने की रंगभेद की शिकायत
पाकिस्तान में गोरे रंग को लेकर आकर्षण सनक की श्रेणी तक है। इसको लेकर वहां की कई महिलाओं के वीडियो सामने आते रहे हैं। कई महिलाओं ने यहां तक कहा है कि सांवली लड़कियों को पढ़ाया भी नहीं जाता है, क्योंकि उनकी पढ़ाई में लगने वाले पैसे से उनके लिए जहेज इकट्ठा किया जाता है। कई अभिनेत्रियां भी इस बात की शिकायत कर चुकी हैं कि पाकिस्तान में रंगभेद बहुत अधिक है और सांवली रंगत या फिर गेहुंएं रंग वाली अभिनेत्रियों को भूमिकाएं भी नहीं मिलती हैं। आमना इलियास ने कहा था कि जब उन्होंने मॉडलिंग और अभिनय का करियर शुरू किया था तो उन्हें उनकी सांवली रंगत के कारण बहुत भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने पाकिस्तान के स्टार्स से यह अनुरोध किया है कि वे गोरा बनाने वाली क्रीम का प्रचार न किया करें। उन्होंने हमेशा ही इस बात के लिए आवाज उठाई है कि जो जैसा है, वैसा ही उसे टीवी पर भी दिखना चाहिए।
जरनिश खान ने भी आवाज उठाई थी
रोमैस खान ने भी इस भेदभाव के बारे में हाल ही में कहा था कि उन्हें उनकी सांवली रंगत के कारण अक्सर अस्वीकार कर दिया जाता था। पाकिस्तान टीवी की अदाकारा जरनिश खान ने भी इस रंगभेद के विषय में आवाज उठाई थी, जब उन्हें उनकी एक इंस्टाग्राम पोस्ट पर गेहूएं रंग को लेकर किसी ने ताना मारा था। सबा हमीद ने भी इस रंगभेद के बारे में बात की थी। उन्होनें एक पॉडकास्ट में इस विषय पर बात करते हुए कहा था कि हालांकि उन्हें रंग के आधार पर किसी भी रीजेक्शन का सामना नहीं करना पड़ा था और उन्हें ऐसा लगता रहा कि उनका रंग बहुत साफ है, मगर उन्होनें दूसरी अन्य गहरी रंगत वाली महिलाओं के साथ टीवी इंडस्ट्री में होने वाले भेदभाव को देखा था। उन्होंने एक लड़की के विषय में बात करते हुए कहा कि उन्हें पता चल था कि एक लड़की को केवल इसलिए भूमिका नहीं मिली थी क्योंकि उसका रंग गहरा था, जबकि वह बहुत ही अधिक प्रतिभाशाली, सुंदर, लंबी और साइज जीरो टाइप की थी।
सामाजिक सड़न की ओर पाकिस्तान
पाकिस्तान जिसकी स्थापना कथित समानता के नाम पर हुई थी, उस पाकिस्तान में रंग के आधार पर यह भेदभाव कहीं न कहीं बहुत बड़ी सामाजिक सड़न की ओर संकेत करता है, जहां पर लड़कियों को केवल और केवल रंग के आधार पर आँका जाता है।











