स्कॉटलैंड में गर्भपात को लेकर नए संभावित नियम को लेकर हंगामा मचा हुआ है। यह हंगामा इसलिए है कि महिला अधिकारों की आड़ में मजहबी एजेंडा कहीं न कहीं लागू किया जा रहा है। स्कॉटलैंड में एक नए प्रस्तावित कानून के अनुसार ऐसा हो सकता है कि “लिंग” के आधार पर गर्भपात की अनुमति दे दी जाए। स्कॉटलैंड में लिंग के आधार पर गर्भपात की अनुमति अभी नहीं है। अभी इसे अबॉर्शन एक्ट 1967 के अंतर्गत इसलिए अवैध माना जाता है। क्योंकि यह ऐसा कोई भी वैध आधार नहीं है, जिसके कारण महिला गर्भपात करवा सके।
परंतु स्कॉटलैंड की सरकार द्वारा निर्मित की गई एक रिपोर्ट के अनुसार इस प्रक्रिया को गर्भपात के अधिकार के आधार पर बदला जा सकता है। शुक्रवार को प्रकाशित एक्सपर्ट रिव्यू में कहा गया है कि भविष्य में किसी भी कानून में लिंग-चयनात्मक गर्भपात पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध शामिल नहीं होना चाहिए।
गर्भपात पर हंगामा क्यों?
टेलीग्राफ के अनुसार, इस रिव्यू की अध्यक्षता करने वाली प्रोफेसर एनी ग्लासियर ने कहा कि समूह का मानना है कि इस प्रथा पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाना “अनावश्यक” और “संभावित रूप से हानिकारक” है।
उनका कहना है कि इस बात के बहुत ही कम सबूत मिले हैं कि स्कॉटलैंड में यह प्रथा मानी जाती है और इसके लागू करना इसलिए कठिन होगा क्योंकि इसके लिए उन लोगों के साथ काफी अधिक पूछताछ करनी होगी, जो गर्भपात करवाने के लिए आएंगी। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि इससे उन महिलाओं के साथ नस्लीय रूप से भेदभाव होगा, जो उन विशेष समुदायों से हैं, जहां पर लिंग आधारित गर्भपात संभावित रूप से होता है।
दरअसल, इसे लेकर यह कहा जा रहा है कि आखिर महिलाओं का जो गर्भपात का अधिकार है, वह इस आधार पर रोका कैसे जा सकता है कि वह लिंग के आधार पर गर्भपात नहीं करा सकती है? सलाहकारों ने यह जोर देकर कहा कि महिलाओं को किसी भी कारण से अपना गर्भपात करवाने की आजादी होनी चाहिए, यहाँ तक कि यदि वे इस कारण से गर्भपात करवा रही हैं कि उन्हें बेटा नहीं चाहिए या बेटी नहीं चाहिए?
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सियासत से लेकर आम जनता तक विरोध
इस अनुशंसा को लेकर अब लगातार विरोध हो रहा है। राजनीतिक दलों से लेकर आम लोग तक इसका विरोध कर रहे हैं। इसे लेकर यह कहा जा रहा है कि यह कुछ “अल्पसंख्यक” समूहों के लोगों का तुष्टीकरण करने के लिए परिवर्तन किए जा रहे हैं, जो लड़कियों पर लड़कों को प्राथमिकता देते हैं।
डेली मेल के अनुसार कंज़र्वेटिव नेता केमी बेडेनोच ने कहा: ‘यह एक ऐसी पार्टी का बेहद घिनौना विचार है जिसके पास विचारों का अभाव है। स्कॉटलैंड जितनी जल्दी एसएनपी से मुक्त हो जाएगा, स्कॉटलैंड के लिए उतना ही बेहतर होगा।’ वहीं इस अनुशंसा पर टोरी इक्वालिटी स्पोकपर्सन क्लेयर कॉउटिन्हो ने आगे कहा: शिशुओं को इस आधार पर मारना कि उनका लिंग वांछित नहीं है, एक ऐसा भयावह सपना है जो ब्रिटेन की बजाय कम्युनिस्ट चीन के लिए ज़्यादा उपयुक्त होगा।’ उन्होनें आगे कहा कि “लिंग के आधार पर गर्भपात का ब्रिटेन में कोई स्थान नहीं है, और इसे अपनाना प्रगति के बिल्कुल विपरीत होगा।’
उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण बात करते हुए कहा कि “दुर्भाग्य से इस प्रकार की समानता का संस्करण महिलाओं को बहुत गहरे अंधेरे में ले जाएगा।“ इतना ही नहीं एसएनपी मंत्रियों की इस रिव्यू में यह भी कहा गया है कि वे जन्म तक किसी भी समय गर्भपात की अनुशंसा पर विचार कर रहे हैं, यदि दो मेडिकल पेशेवरों, डॉक्टर्स, नर्स या मिडवाइव्स ऐसी अनुशंसा करते हैं कि यह उचित है और इसके साथ ही पूर्ण अवधि के गर्भपात को अपराध से हटाने पर भी विचार कर रही है।
लोगों का तर्क
इस अनुशंसा का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि आखिर कैसे इस कथित कदम को आजादी कहा जा सकता है? कैसे इसे महिला अधिकार कहा जा सकता है? इस कदम के बाद यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि “अबॉर्शन टूरिज़म अर्थात गर्भपात पर्यटन” वहाँ पर बढ़ जाएगा। कुछ लोग इसे कट्टरपंथियों के दबाव में उठाया गया कदम भी बता रहे हैं। शैडो स्कॉटिश सचिव, एंड्रयू बॉवी ने कहा: “यह उस सरकार का एक बेहद भयावह कदम है जो हमारे देश में ऐसे सामाजिक परिवर्तन ला रही है, जो कट्टरपंथियों के द्वारा संचालित हो रहे हैं।“ उन्होनें आगे कहा कि “ऐसा होने नहीं दिया जा सकता। एसएनपी को सामने आकर इस बात से इनकार करना चाहिए कि वे अभी इस कदम पर विचार कर रहे हैं।”
सोशल मीडिया पर इस प्रस्तावित कानून का लोग लगातार विरोध कर रहे हैं। मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस बात का भी विरोध कर रहे हैं कि केवल लिंग आधारित गर्भपात का ही विरोध क्यों किया जा रहा है, किसी भी प्रकार से गर्भपात का विरोध किया जाना चाहिए।











