पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) पर चुनाव आयोग कड़ा रुख अपना रखा है। इस मामले में आयोग ने (EC) ने हाल ही में अधिकारियों को साफ-साफ कह दिया है कि इसमें कोई ढील नहीं चलेगी। आयोग ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर कोई चूक पाई गई तो उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा। दोषियों के खिलाफ निलंबन से लेकर कानूनी एक्शन तक लिया जा सकता है। ये बातें उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती ने कोलकाता में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही है।
SIR प्रक्रिया क्या है?
SIR यानी स्पेशल समरी रिवीजन, ये चुनाव आयोग का वो प्लान है, जिसके तहत वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में ये नवंबर 2025 से शुरू हो चुका है। इसमें हर बूथ लेवल पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और दूसरे स्टाफ को घर-घर जाकर वोटरों की जानकारी अपडेट करनी पड़ती है। अगर कोई नाम गलत है, डुप्लिकेट है या पुराना हो गया है, तो उसे सही किया जाता है। EC का कहना है कि ये प्रक्रिया 25 जनवरी 2026 तक चलेगी, क्योंकि तब गणतंत्र दिवस के बाद ही असली फाइनल लिस्ट बनेगी। अभी तक लाखों फॉर्म्स जमा हो चुके हैं, लेकिन अभी भी कई जगह देरी हो रही है।
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अधिकारियों पर सख्ती: जवाबदेही तय
चुनाव आयोग ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि SIR में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अगर कोई BLO या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट लेवल पर गड़बड़ी पाई गई, तो जीरो टॉलरेंस पॉलिसी लागू होगी। मतलब, सस्पेंडेशन से लेकर कानूनी कार्रवाई तक हो सकती है। EC के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “हम हर स्टेप पर मॉनिटरिंग कर रहे हैं। डेली रिपोर्ट्स और फील्ड विजिट्स से चेक होगा कि काम सही से हो रहा है या नहीं।” खासकर उन इलाकों पर नजर जहां पहले वोटर लिस्ट में विवाद हुए हैं, जैसे सीमावर्ती एरिया या शहरी स्लम्स।
महत्वपूर्ण डिटेल्स और अपडेट
अगर आप पश्चिम बंगाल के वोटर हैं तो आप ऑनलाइन पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाकर फॉर्म 6, 7 या 8 भर सकते हैं। नाम जोड़ने, हटाने या बदलाव के लिए आखिरी तारीख 25 दिसंबर 2025 है। EC ने कहा है कि महिलाओं, युवाओं और ट्रांसजेंडर वोटर्स के लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे। अभी तक 80% से ज्यादा कवरेज हो चुका है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में चुनौतियां हैं, जैसे नेटवर्क की दिक्कत या जागरूकता की कमी। ये प्रक्रिया न सिर्फ लोकसभा चुनावों के लिए जरूरी है, बल्कि लोकल बॉडी इलेक्शन्स के लिए भी बेस बनेगी।

















