देश में विपक्ष की एक रणनीति रही है कि अगर वो कहीं चुनाव जीतता है तो उसे लोकतंत्र की जीत बताता है और अगर चुनाव हार जाए तो ईवीएम और चुनाव आयोग को बीजेपी की बी टीम कह देता है। राहुल गांधी ऐसा ही करके लगातार देश की संवैधानिक संस्थाओं की छवि को खराब कर रहे हैं। इसके विरोध में देश के रिटायर्ड जज, IAS-IPS, फौजी अफसर और राजदूतों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने राहुल गांधी से ऐसा नहीं करने की अपील की है।
दरअसल, बिहार चुनाव से लगातार ये देखा जा रहा है कि राहुल बार-बार चुनाव आयोग पर कीचड़ उछाल रहे हैं। कहते हैं उनके पास “चुनाव चोरी” के पुख्ता सबूत हैं, मगर आज तक कोर्ट की दहलीज तक नहीं पहुँचे। बस रैली दर रैली, प्रेस कॉन्फ्रेंस दर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग को बीजेपी की B-टीम बताते घूम रहे हैं। इन पूर्व अफसरों का कहना है—भाई, इतना गुस्सा है तो कोर्ट में जाओ ना, यहाँ जनता को गुमराह करने से क्या फायदा?
इनके हस्ताक्षर का वजन समझिए
इस चिट्ठी पर कुल 272 बड़े नामों के दस्तखत हैं।
16 रिटायर्ड जज
123 पूर्व नौकरशाह (IAS, IPS वगैरह)
133 रिटायर्ड आर्मी, नेवी, एयरफोर्स अफसर
14 पूर्व राजदूत
ये वो लोग हैं जिन्होंने जिंदगी भर देश की सेवा की है। ये पहले भी संसद, सेना और जजों पर हमला होने पर चुप नहीं बैठे। अब जब बारी चुनाव आयोग की आई है तो बोले—बस बहुत हुआ, अब और बर्दाश्त नहीं।
272 eminent citizens, consisting of 16 Judges, 123 retired bureaucrats, including 14 Ambassadors, 133 retired armed forces officers, write an open letter condemning the LoP and the Congress Party’s attempts to tarnish constitutional bodies like the Election Commission of India.… pic.twitter.com/lcHnboFV57
— ANI (@ANI) November 19, 2025
चिट्ठी में क्या-क्या कहा है
इसमें सीधे-सीधे कहा गया है कि ये राहुल गांधी की हताशा बोल रही है। जब आपकी पार्टी या गठबंधन कहीं जीत जाता है तो आयोग सबसे स्वतंत्र, सबसे शानदार। जैसे ही हार मिली—चुनाव आय़ोग को बीजेपी का पिट्ठू बताने लगते हैं। इन लोगों ने याद दिलाया कि मतदाता सूची को साफ करने का सारा काम सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की निगरानी में हुआ है। लाखों फर्जी, डुप्लीकेट और मरे हुए वोटरों के नाम हटाए गए, नए वोटर जोड़े गए—सब कोर्ट के आदेश पर। फिर भी बिना एक पन्ना सबूत दिखाए आयोग को चोर-डाकू बताना कहाँ का न्याय है?
इनका कहना है कि पहले सेना पर उंगली उठाई, फिर जजों को निशाना बनाया, अब चुनाव आयोग की बारी। कांग्रेस के साथ-साथ कुछ लेफ्ट वाले NGO और एक्टिविस्ट भी इसमें कूद पड़े हैं। ये जहरीला माहौल बना रहे हैं।
असली चिंता क्या है
इन रिटायर्ड लोगों को दुख इस बात का है कि नीति की, काम की, भ्रष्टाचार की, बेरोजगारी की बहस कोई नहीं करना चाहता। बस संस्थाओं को गाली दो, कोर्ट जाने की हिम्मत नहीं। भावनाएँ भड़काओ, अफवाह फैलाओ, लोकतंत्र को अंदर से खोखला करो। इन लोगों का कहना है कि सबूत हैं तो कोर्ट में पेश करें। इस तरह से देश की संस्थाओं पर हमला देश को नुकसान पहुंचा रहा है।
















