एयर इंडिया इन दिनों मुश्किलों के दौर से गुजर रही है। पाकिस्तान ने अप्रैल के आखिर में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद भारतीय एयरलाइंस को अपने एयरस्पेस इस्तेमाल करने से रोक दिया। इससे एयर इंडिया को भारी नुकसान हो रहा है। कंपनी ने भारतीय सरकार से गुजारिश की है कि वो चीन से बात करके उसे शिनजियांग प्रांत के एयरस्पेस को खोलने को कहे, ताकि एयर इंडिया उस रास्ते से जा सके। इससे फ्लाइट रूट छोटे हो जाएंगे, फ्यूल खर्च कम होगा और सफर का समय घटेगा। ये रिक्वेस्ट अक्टूबर के आखिर में सरकार को सौंपी गई थी।
एयर इंडिया की लागत 29 फीसदी बढ़ी
ये अनोखी मांग ठीक उसी वक्त आई है, जब हिमालयी बॉर्डर पर झड़प के पांच साल बाद भारत-चाइना के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर शुरू हुई हैं। एयर इंडिया जून में गुजरात में लंदन जाने वाली बोइंग 787 ड्रीमलाइनर क्रैश के बाद अपनी इमेज सुधारने और इंटरनेशनल नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश में लगी है। उस हादसे में 260 लोग मारे गए थे, जिसके बाद सेफ्टी चेक के लिए कुछ फ्लाइट्स कैंसल करनी पड़ी थी। लेकिन पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण कंपनी का आर्थिक बजट बिगड़ रहा है। एयर इंडिया, जो भारत की इकलौती बड़ी इंटरनेशनल कैरियर है, को लॉन्ग-हॉल रूट्स पर फ्यूल कॉस्ट 29% तक बढ़ गई है। कुछ रूट्स पर सफर का समय तीन घंटे ज्यादा लग रहा है।
डॉक्यूमेंट के मुताबिक, सरकार शिनजियांग के होतान, कश्गर और उरुमची एयरपोर्ट्स पर इमरजेंसी लैंडिंग की सुविधा के लिए चीन से बात करने पर विचार कर रही है। इससे अमेरिका, कनाडा और यूरोप के रूट्स तेजी से कवर हो सकेंगे। डॉक्यूमेंट कहता है, “एयर इंडिया का लॉन्ग-हॉल नेटवर्क ऑपरेशनल और फाइनेंशियल दबाव में है।”
पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने से प्रॉफिट बिफोर टैक्स पर सालाना 455 मिलियन डॉलर का असर पड़ रहा है। ये रकम बड़ी है, क्योंकि फिस्कल ईयर 2024-25 में कंपनी को 439 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। चाइना की फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं, और उन्होंने “रिलेवेंट अथॉरिटीज” को रेफर किया।
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होतान रूट के बिना कुछ रूट्स ‘अनवायबल’ हो रहे
चीन का वो एयरस्पेस जो एयर इंडिया मांग रही है, दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों से घिरा है—कई जगह 20,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई है। डीकंप्रेशन जैसी इमरजेंसी में सेफ्टी रिस्क ज्यादा है, इसलिए इंटरनेशनल एयरलाइंस इसे अवॉइड करती हैं। सबसे बड़ी बात, ये पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के वेस्टर्न थिएटर कमांड के अंदर आता है। यहां मिसाइल, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम्स भरे पड़े हैं। कुछ एयरपोर्ट्स मिलिट्री और सिविल दोनों शेयर करते हैं। पेंटागन की दिसंबर रिपोर्ट कहती है कि ये कमांड भारत से किसी भी तरह के विवाद का जवाब देने का जिम्मेदार है।
चीन की मिलिट्री एयरस्पेस पर जितना कंट्रोल रखती है, उतना किसी दूसरे देश में कम ही देखने को मिलता है। फ्लाइट पाथ्स सख्ती से रिस्ट्रिक्टेड हैं। ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस ट्रैकर डेमियन साइमन कहते हैं कि होतान एयरबेस को हाल ही में बढ़ाया गया है। एयरनैव रडार डेटा से पता चलता है कि पिछले 12 महीनों में होतान एयरपोर्ट पर कोई नॉन-चाइनीज एयरलाइन की फ्लाइट नहीं आई-गई। एविएशन कंसल्टेंसी एंडाऊ एनालिटिक्स के फाउंडर शुकोर यूसुफ कहते हैं, “एयर इंडिया कोशिश कर सकती है, लेकिन चीन के मानने की संभावना कम है। इसका कारण इलाके की टेरेन, इमरजेंसी एयरपोर्ट्स की कमी और सिक्योरिटी इश्यूज की वजह है।”
दुनियाभर में सिकुड़ रहे एयरस्पेस
दुनिया भर में एयरस्पेस कंफ्लिक्ट जोन्स की वजह से सिकुड़ रहा है। 2022 में यूक्रेन वॉर से अमेरिकी कैरियर्स को रूस के ऊपर फ्लाई करने से बैन कर दिया गया, जिससे कई यूएस-इंडिया रूट्स बंद हो गए। इससे एयर इंडिया को नॉन-स्टॉप फ्लाइट्स पर मोनोपॉली मिल गई। लेकिन पाकिस्तान बंद के बाद दिल्ली-वॉशिंगटन रूट अगस्त में सस्पेंड हो गया। अब मुंबई और बेंगलुरु से सैन फ्रांसिस्को के डायरेक्ट रूट्स “अनवायबल” हो रहे हैं। कोलकाता में टेक्निकल स्टॉप के साथ सफर तीन घंटे लंबा हो गया है। डॉक्यूमेंट कहता है, लुफ्थांसा की सैन फ्रांसिस्को-मुंबई फ्लाइट म्यूनिख वाया अब एयर इंडिया से सिर्फ पांच मिनट ज्यादा लंबी है। “पैसेंजर्स शॉर्टर टाइम की वजह से फॉरेन कैरियर्स की तरफ शिफ्ट हो रहे, क्योंकि उन्हें पाकिस्तान ओवरफ्लाइट का फायदा मिल रहा।”
एयर इंडिया का अनुमान है कि होतान रूट से एक्स्ट्रा फ्यूल और टाइम काफी कम हो जाएगा। न्यूयॉर्क और वैंकूवर-दिल्ली जैसे रूट्स पर 15% तक पैसेंजर और कार्गो कैपेसिटी कट चुकी है। इससे हफ्ते में 1.13 मिलियन डॉलर का नुकसान रुक सकता है।
कैश फ्लो का बोझ फाइनेंशियल परेशानियां बढ़ा रहा
पाकिस्तान एयरस्पेस बंद के खुलने के कोई संकेत नहीं, इसलिए एयर इंडिया “टेम्परेरी सब्सिडी” मांग रही है। कंपनी ने 70 बिलियन डॉलर के एयरक्राफ्ट ऑर्डर्स प्लेस किए हैं। साथ ही, पुराने टैक्स इश्यूज सॉल्व करने में मदद चाहिए। 2022 में टाटा को बेचते वक्त सरकार ने लीगेसी क्लेम्स से इंडेम्निफाई किया था, लेकिन अब 725 मिलियन डॉलर के पुराने टैक्स लायबिलिटीज पर नोटिसेस आ रहे हैं। इससे लीगल और रेपुटेशन रिस्क बढ़ रहा। मार्च का एक कन्फिडेंशियल गवर्नमेंट नोटिस दिखाता है कि टैक्स अथॉरिटीज ने 58 मिलियन डॉलर रिकवर करने के लिए “कोर्सिव स्टेप्स” की चेतावनी दी—जिसमें एसेट्स फ्रीज करना शामिल हो सकता है। कंपनी कहती है, “डिसइन्वेस्टमेंट के दौरान आश्वासनों के बावजूद ये डिमांड्स कैश फ्लो पर एक्स्ट्रा बोझ डाल रही हैं।”

















