सुप्रीम कोर्ट न्यायिक मामलों में तेजी लाने की दिशा में काम कर रहा है। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार से एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) के मामलों के ट्रायल को महज छह महीने में पूरा करने का एक ठोस प्लान बनाने को कहा है। ये निर्देश ऐसे केसों के लिए हैं, जहां देश और आम जनता के खिलाफ अपराध होते हैं। कोर्ट का कहना है कि लंबे समय तक जमानत न मिलने की वजह से आरोपी पक्ष चिल्ला-चिल्ला कर शोर मचाते हैं, लेकिन अगर ट्रायल तेज हो जाएं तो ये दिक्कत कम हो जाएगी।
तेज ट्रायल की जरूरत क्यों?
अगले चीफ जस्टिस बनने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुयान और एन के सिंह की बेंच ने मंगलवार को ये बात कही। उन्होंने साफ कहा, “हमें एक ऐसी व्यवस्था चाहिए जो ट्रायल को जल्दी निपटाने के लिए कमिटेड हो, खासकर छह महीने के अंदर। ताकि देश के खिलाफ अपराधों वाले केसों में जमानत न मिलने पर कोई हंगामा न हो।” ये बेंच एनआईए केसों में देरी को लेकर चिंतित दिखी। उनका मकसद है कि आरोपी लंबे इंतजार में न फंसें और न्याय जल्दी पहुंचे।
खास एनआईए कोर्ट्स, अच्छी सुविधाओं के साथ
कोर्ट ने एनआईए के लिए अलग-अलग कोर्ट बनाने की बात पर जोर दिया, जहां सारी जरूरी चीजें हों। जैसे वाई-फाई, वर्चुअल अपीयरेंस की सुविधा, ताकि आरोपी को बार-बार अदालत आने की जरूरत न पड़े और सुनवाई में देरी न हो। जस्टिस कांत ने ये टिप्पणी गृह मंत्रालय की स्टेटस रिपोर्ट पढ़ने के बाद की, जो एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दी थी। रिपोर्ट में एनआईए के लिए एक्सक्लूसिव कोर्ट्स सेटअप करने का प्लान था। बेंच ने इसकी तारीफ की, लेकिन बोली कि इसे और तेज करो। अगली सुनवाई 16 दिसंबर को है, तब तक फाइनल प्लान तैयार रखना। जस्टिस कांत ने दिल्ली हाई कोर्ट को भी सलाह दी कि इन स्पेशल कोर्ट्स में रेगुलर केस न डालो, सिर्फ एनआईए वाले ही रखो।
लंबित केस और सरकार की तैयारी
दिल्ली हाई कोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 50 एनआईए केस लंबित हैं। इनमें से दो कड़कड़डूमा कोर्ट में और 48 पटियाला हाउस कोर्ट में हैं। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस डी संजय ने कोर्ट को बताया कि सरकार 10-12 एक्सक्लूसिव कोर्ट्स खोलने की प्लानिंग कर रही है। लेकिन जगह ढूंढना मुश्किल हो रहा है। बेंच ने सुझाव दिया कि सरकारी इमारतों का इस्तेमाल करो, जहां अस्थायी तौर पर ये कोर्ट्स चल सकें। जब तक परमानेंट बिल्डिंग न बने।
















