थूक लगाकर रोटी बनाने, फलों और सब्जियों पर थूक लगाने के वीडियो अक्सर सामने आते हैं। इनमें जो आरोपी पकड़े गए हैं, उनकी उम्र परिपक्वता वाली थी और यह कहा जा सकता है कि वे अपराध की तरफ मुड़ गए या फिर मजहबी कट्टरता ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया। लेकिन, उत्तर प्रदेश में बागपत से एक बहुत ही हैरान करने वाला समाचार आया है। यहां कुछ मुस्लिम बच्चों ने गैर-मुस्लिमों के प्रति अपनी नफरत दिखाई। यह ऐसी उम्र होती है, जिसमें मजहब की दीवारें नहीं रहती हैं। उनके लिए उनकी पढ़ाई और किताबें और खेल ही मायने रखते हैं। मगर ऐसी उम्र में ही क्या उनके मन में अपने मजहब से इतर लोगों के प्रति इस सीमा तक नफरत भर सकती है कि वह उनके पानी में मूत्र मिला दें?
बागपत में ढिकौली के एक प्राथमिक विद्यालय में एक व्यक्ति की सात वर्षीय बेटी, इनके पड़ोस के दूसरे व्यक्ति की 10 वर्षीय बेटी और छह वर्ष का बेटा पढ़ते हैं। गुरुवार को तीनों ही बच्चे इंटरवल के समय खेल रहे थे। इसी दौरान छह से आठ वर्ष के तीन मुस्लिम बच्चे उनकी बोतल उठाकर ले गए और उन्होंने उसमें अपना मूत्र मिला दिया। यह कल्पना ही कठिन है कि मात्र छह से आठ वर्ष के बच्चे इतनी घिनौनी हरकत कर सकते हैं? ये बच्चे बोतल को लेकर शौचालय में गए और बोतल में मूत्र भरकर उसे वापस रख दिया। जब बच्चों ने उस पानी को पिया तो उन्हें स्वाद भी खराब लगा और उसमें से दुर्गंध आई। बच्चों ने इसकी शिकायत प्रधानाध्यापक से की और फिर उसके बाद प्रधानाध्यापक ने जब पूछताछ की तो मुस्लिम बच्चों के एक दोस्त ने ही बताया कि आखिर यह किसने यह हरकत की है।
बच्चों की बिगड़ी तबीयत
यह सुनते ही प्रधानाध्यापक ने पीड़ित बच्चों के परिजनों को बुलाकर घटना की जानकारी दी। छुट्टी के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और फिर उनका उपचार निजी चिकित्सालय से चल रहा है। इस घटना के बाद बच्चों के परिजनों और ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा किया।
आखिर मुस्लिम बच्चों ने ऐसा क्यों किया था?
यह प्रश्न उठता है कि आखिर उन मुस्लिम बच्चों ने इतनी छोटी उम्र में इतना जहरीला कदम कैसे और क्यों उठाया? उन्हें किसने यह सिखाया? जब वास्तविकता पता चली तो एक और हैरान करने वाला खुलासा हुआ। जब पुलिस द्वारा जांच हुई तो पता चला कि एक मुस्लिम बच्चे ने अपने वालिद के मोबाइल पर यह कंटेन्ट देखा था कि गैर मुस्लिमों को पेशाब पिलाना चाहिए तो उसने ऐसा कदम उठाया। गांव वालों का यह भी कहना है कि इस घटना के पीछे गांव का ही एक मौलवी है, जो बच्चों को इस तरह की हरकतें करने के लिए उकसा रहा था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्कूल के प्रधानाध्यापक का कहना है कि इसमें मौलवी का हाथ हो सकता है। क्योंकि इस मौलवी ने 15 अगस्त को भी कुछ बच्चों को मस्जिद में रोक लिया था। बच्चों को बुलाया गया तो वे आते ही अल्लाह हू अकबर के नारे लगाने लगे थे। लोगों के समझाने के बाद मामला शांत हो गया था।
हैरान करने वाला खुलासा
पुलिस ने मुख्य आरोपी के वालिद के खिलाफ बीएनएस की धारा 196 और 1बी के तहत कार्रवाई की है। यह घटना अत्यंत स्तब्धकारी है, क्योंकि इसमें मासूमों को नफरत फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस घटना के बाद गांव वालों में काफी आक्रोश है और इस घटना के बाद विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया था।












