बागेश्वर जिले के 67 वर्षीय किशन मलड़ा ने हजारों नहीं, बल्कि लाखों पेड़ लगाकर एक नई मिसाल कायम की है और इस नेक काम के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। बचपन में जब शान घर में चिड़िया लाने की जिद कर रहे थे, तो उनकी मां ने कहा था – “बेटा, घर में पेड़ ही नहीं हैं, चिड़िया कहाँ रहेगी?” बस, उसी दिन से शुरू हुई पेड़ पौधे लगाने का अभियान जो कि आज 10 लाख पेड़ों का जंगल उनके घर के आसपास कई हेक्टेयर में बन चुका है! उनके घर में ढाई बीघा जमीन पर बनी ‘देवकी लघु वाटिका’ में लगभग 280 प्रजातियों के पौधे हैं – रुद्राक्ष, चंदन, ओक, पारिजात, बांस, मूंगा रेशम जैसे बहुमूल्य वृक्ष, जिन पर शोध करने के लिए देश-दुनिया से छात्र आते हैं।
41 वर्षों से लगातार पेड़ लगाने वाले किशन मलड़ा को अब हर कार्यक्रम में एक ‘पर्यावरणविद्’ के रूप में आमंत्रित किया जाता है। उन्हें उत्तराखंड राजभवन द्वारा ‘ट्री मैन’ पुरस्कार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ‘मैं हूं उत्तराखंड’ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
किशन मलड़ा आज भी अपना समय पेड़ लगाने और उनकी देखभाल में लगा रहे हैं। उन्हें देखकर उनके आस-पास के लोग, खासकर युवा, भी उनके अभियान से जुड़ रहे हैं। प्रचार से कोसो दूर रहने वाले किशन अपनी पेड़ पौधों परिंदों की दुनियां में खुश हैं। उनकी कहानी ये साबित करती है कि अगर एक जिद सच्ची हो, तो एक चिड़िया के बहाने भी पूरा जंगल उगाया जा सकता है। हकीकत तो यह है कि उनके जैसे लोगों की बदौलत ही देवभूमि उत्तराखंड के जंगल और हवा सुरक्षित हैं।















