पाकिस्तान में कट्टरपंथ किस सीमा तक हावी है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि वे सैयद और गैर सैयद का निकाह ड्रामा में भी नहीं देख सकते। भावनाएं इस हद तक आहत हो सकती हैं कि वे एफआईआर तक दर्ज करवा देते हैं और वह भी चैनल के खिलाफ?
यह सुनकर हैरानी हो सकती है, मगर पाकिस्तान में “शेर” ड्रामा को लेकर यह हो चुका है। “शेर” एक धारावाहिक है, जो कुनबों के बीच दुश्मनी और फिर उनके बच्चों के बीच प्रेम को दिखाता है। शेर जब टेलीकास्ट होता था, तो उसकी व्यूअर शिप काफी अधिक थी। इसमें कथित रूप से एक सैयद लड़की की गैर सैयद लड़के से निकाह की बात दिखाई गई। इसमें दानिश तैमूर और सारा खान ने मुख्य भूमिका निभाई। ये वही दानिश तैमूर हैं, जिनका चार निकाह को लेकर बयान वायरल हुआ था।
अब धारावाहिक में इस शादी के खिलाफ पाकिस्तान में एफआईआर दर्ज हुई। बेअदबी को लेकर दादू और सिंध में शिया समुदाय के लोगों ने एफआईआर दर्ज कराई। इसमें लिखा कि इस शो में एक सैयद लड़की और गैर सैयद लड़के के बीच शादी दिखाकर अपमान किया गया है।
कौन होते हैं सैयद?
अब प्रश्न यह उठता है कि सैयद कौन हैं, जिनको लेकर इतनी बातें होती हैं। सैयद वे लोग होते हैं, जिनके विषय में कहा जाता है कि वे इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के खानदान के हैं।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी ही उड़ा रहे मजाक
सोशल मीडिया पर इसे लेकर पाकिस्तानी ही मजाक कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे अरब से ज्यादा सैयद शायद पाकिस्तान में मिलते हैं। कराची में, हर तीसरा व्यक्ति जिससे हम मिलते हैं या टकराता है, वह सैयद ही निकलता है। इस पर सोशल मीडिया पर काफी हलचल है और लोग यह भी कह रहे हैं कि शायद कोई सुपरहिट ड्रामा के कारण पैसा कमाना चाहता है।
सैयद लड़कियों को लेकर हक बख्शीश भी हाल तक जारी थी
एक और रवायत सैयद परिवारों में लड़कियों की शादी से जुड़ी है। अभी हाल तक कुछ सैयद परिवारों में यह रवायत थी कि यदि उन्हें अपनी लड़की के लिए कोई सही लड़का नहीं मिलता था, तो उसकी शादी कुरआन से करवा दी जाती थी। इन लड़कियों को कुरआन की दुल्हन कहा जाता था और ऐसा भी कहा जाता था कि यह रईस परिवारों की एक चाल यह भी होती थी कि उन्हें परिवार की दौलत का बंटवारा न करना पड़े।
पाकिस्तान में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने यह साफ कहा था कि जागीरदार लोग, अपनी बहनों और बेटियों को खानदान की विरासत से दूर रखने के लिए, उनकी शादी कुरआन से करवा देते थे और उनके हिस्से की दौलत अपने पास रखकर उसकी देखभाल करते थे। उन्हें यह डर होता था कि उनकी बेटियों या बहनों की शादी हो जाएगी तो कुछ हिस्सा ही सही, मगर वह खानदान से बाहर चला जाएगा। हालांकि पाकिस्तान में इस पर पाबंदी है, मगर फिर भी यह कहा जाता है कि यह रवायत अभी भी जारी है।
बहरहाल “शेर” ड्रामा पर एफआईआर ने एक बार फिर से बहस जिंदा कर दी है कि क्या वास्तव में मुस्लिमों में ऊंच-नीच इस सीमा तक है कि ड्रामा तक में सैयद और गैर सैयद की शादी नहीं देख सकते हैं?
















