लंदन के दो काउंसलर्स पर इन दिनों विवाद हो रहा है। वैसे भी ब्रिटेन में विवाद इस कदर हावी हैं कि विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं और साथ ही ये विवाद भी प्रवासियों को लेकर ही हैं, मगर यह विवाद कुछ अलग हटकर है। इस बार विवाद यह है कि लंदन के दो काउंसलर्स चुने तो लंदन के दो क्षेत्रों के लिए हैं, मगर वे लोग बांग्लादेश में भी चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं और शायद वहाँ पर सांसद पद के लिए भी चुनाव लड़ें। कुछ समाचारों के अनुसार सबीना खान और ओहिद अहमद दो ऐसे काउंसलर्स हैं, जो लंदन के टावर हैमलेट्स काउंसिल में कार्यरत हैं, मगर वे बांग्लादेश मे आगामी आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की ओर से खड़े होना चाहते हैं।
पद लंदन में और चुनाव प्रचार बांग्लादेश में
सबीना खान और ओहिद अहमद दोनों की ही बांग्लादेश में चुनाव प्रचार कार्यक्रमों में भाग लेते हुए तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें यह स्पष्ट दिख रहा है कि वे लोग स्थानीय उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार तो कर ही रहे हैं, परंतु साथ ही वे सांसद पद के लिए भी खड़े होना चाहते हैं। जैसे ही यह तस्वीरें और समाचार वायरल हुए, वैसे ही इन दोनों ही नेताओं की आलोचना आरंभ हो गई। आम लोगों से लेकर राजनेताओं तक लोगों ने इस निर्णय की आलोचना की। लोगों का कहना है कि आखिर जो लोग लंदन में चुने गए हैं, वे दूसरे देश में चुनाव कैसे लड़ सकते हैं?
बीएनपी की उम्मीदवार बनने की कोशिश में सबीना खान
सोशल मीडिया पर लगभग हर दल के नेता इसकी निंदा कर रहे हैं। standard.co.uk के अनुसार सबीना खान बांग्लादेश नेशनल पार्टी के लिए उम्मीदवार होने के लिए प्रयासरत हैं। सबीना खान लेबर से वर्ष 2022 में चुनी गई थीं, मगर उन्होनें बाद में अस्पाइर पार्टी ज्वॉइन कर ली थी। उनके पास टावर हैमलेट्स टाउन हाल की ओवरव्यू और स्क्रूटिनी कमिटी एवं लाइसेंसिंग कमिटी में महत्वपूर्ण भूमिका पर हैं, मगर फरवरी के बाद से काउंसिल के रेकॉर्ड्स के अनुसार सबीना ने आधी से भी कम बैठकों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
सोशल मीडिया पोस्ट्स से ऐसा प्रतीत हुआ है कि सबीना बांग्लादेश में चुनाव प्रचार कर रही है। यह पाया गया कि गोलापगंज और बेनीबाजार के लिए सबीना खान नामक फेसबुक पेज चला रही हैं, जो खुले तौर पर बीएनपी का समर्थन कर रही हैं। सबीना के साथ ही स्वतंत्र काउन्सलर ओहिद अहमद, जो कि पोपलर में लांसबरी वार्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उनके विषय में भी यही कहा जा रहा है कि वे बीएनपी का प्रत्याशी होने के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
ओहिद अहमद भी बांग्लादेश में ढूंढ रहे चुनावी जमीन
यही नही एक और अन्य टावर हैमलेट्स के काउन्सलर ने यह संकेत दिया है कि वह भी बांग्लादेश के आगामी चुनावों में भाग लेंगे। यह कथित छात्र आंदोलन के बाद होने वाला पहला आम चुनाव है और बांग्लादेश में अब इसे लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।
टावर हैमलेट्स के काउंसलर्स सबीना खान और ओहिद अहमद के बांग्लादेश में चुनाव प्रचार को लेकर लोग यह प्रश्न उठा रहे हैं कि यदि चुने गए काउंसलर्स ही दूसरे देश में चुनावों में खड़े हो रहे हैं, तो फिर उन्हें इस्तीफा देकर वहीं पर रहना चाहिए, क्योंकि जो वे कर रहे हैं, वह बेईमानी है। लोगों का कहना है कि जिन्हें ब्रिटिश लोगों की सेवा करने के लिए चुना गया हो, उनका दूसरे देश में सत्ता लेने का प्रयास करना बहुत ही निंदनीय है।
विरोध कर रहे लोग
Red Lip Riots नामक यूजर ने एक्स पर लिखा कि क्या यह बेहूदा नहीं है कि हमारे टावर हैमलेट्स के काउंसलर्स, जिन्हें स्थानीय ब्रिटिश लोगों की सेवा करने के लिए चुना गया था, वे अब बांग्लादेश की संसद में सीटें तलाश कर रहे हैं।
आगे लिखा कि “यह ब्रिटेन के प्रति वफादारी कैसे हो सकती है? हमारे कानूनों ने इसे अनुमत किया है और ऐसी दोहरी महत्वाकांक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की अयोग्यता नहीं है!”
लोगों का कहना है कि ऐसी दोहरी जिम्मेदारियों से ब्रिटिश लोगों के प्रति उनकी निष्ठा का पता चलता है। वहीं हाउसिंग, कम्युनिटीज मंत्रालय और स्थानीय सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। और साथ ही यह भी कहा कि “हम इस विषय में पूरी तरह से स्पष्ट हैं कि काउंसलर्स को उस संविधान के प्रति कार्य करने के प्रति निष्ठावान होना चाहिए, जिन्होनें उसे चुना है!”
अस्पाइर पार्टी के एक प्रवक्ता का कहना है कि अगर सबीना बांग्लादेश में चुन ली जाती है तो सबीना को काउन्सलर के पद से इस्तीफा देना होगा।
कानून के अनुसार यह गलत नहीं
वहीं सबसे रोचक यह है कि सबीना खान और ओहिद का यह कदम ब्रिटेन के किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं है। टावर हैमलेट्स काउंसिल के एक प्रवक्ता का कहना है कि “यूके अपने आप ही किसी ऐसे व्यक्ति को टावर हैमलेट्स का काउन्सलर होने के लिए अपात्र घोषित नहीं करता है, जो किसी और देश में या तो चुनाव लड़ रहा है या फिर किसी निर्वाचित पद पर है। हालांकि दूसरे देश के ऐसे नियम हो सकते हैं!”
निष्ठा किस ओर?
लोग प्रश्न कर रहे हैं कि ऐसे लोगों की निष्ठा किस ओर रहेगी? express.co.uk के अनुसार कंजर्वेटिव नेता सुज़ैन हॉल ने पूछा “जब वे किसी दूसरे देश में चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे हैं तो वे लंदन का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकते हैं? और साथ ही उन्होनें यह भी कहा कि “इन लोगों को यह चुनना चाहिए कि आखिर वे किस देश के लिए खड़े होना चाहते हैं।“
जो प्रश्न नेता कर रहे हैं, वही सोशल मीडिया पर आम लोग कर रहे हैं कि “इन लोगों की निष्ठा ब्रिटेन के मूल्यों में हैं या फिर अपने मुल्क में?”
















